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ईरान के बिजली संयंत्रों को उड़ाने की ट्रंप की धमकी, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ बोले- यह युद्ध अपराध है

Published: Tue, 07 Apr 2026 08:37 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी पर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने गंभीर आपत्ति जताई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 

HighLights

  1. ट्रंप की ईरान के बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी

  2. अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने इसे संभावित युद्ध अपराध कहा

  3. नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला मानवीय कानून का उल्लंघन है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सभी पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकी पर अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों ने गंभीर आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि यदि नागरिक बुनियादी ढांचे को व्यापक रूप से निशाना बनाया गया और उससे आम नागरिकों की जान पर असर पड़ा, तो इसे युद्ध अपराध माना जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरस के प्रवक्ता स्तेफान दुजारिक ने स्पष्ट कहा कि नागरिक ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत प्रतिबंधित है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक ढांचे का सैन्य उपयोग भी हो रहा हो, तब भी हमला तभी वैध माना जाएगा जब उससे होने वाली नागरिक क्षति अनुपातहीन न हो।

साउथवेस्टर्न ला स्कूल की सैन्य कानून विशेषज्ञ रेचल वैनलैं¨डघम ने कहा कि बिजली संयंत्र नष्ट होने से अस्पताल, जल शोधन केंद्र और आवश्यक सेवाएं ठप पड़ सकती हैं, जिससे बड़े पैमाने पर नागरिक मौतें हो सकती हैं।

यूनिवर्सिटी आफ रीडिंग के अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ माइकल श्मिट ने कहा कि किसी सैन्य लक्ष्य पर हमला तभी वैध है जब कम से कम नागरिक नुकसान सुनिश्चित किया जाए और वैकल्पिक लक्ष्य पहले परखे जाएं।

ट्रंप ने सोमवार को फिर कहा कि यदि ईरान मंगलवार रात तक होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोलता, तो उसके बिजली संयंत्र जलते और विस्फोट करते नजर आएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें युद्ध अपराध के आरोपों की चिंता नहीं है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी दबाव के बीच कांग्रेस में भी मतभेद उभर आए हैं।

रिपब्लिकन सीनेटर जोनी अ‌र्न्स्ट ने ट्रंप के बयान को रणनीतिक दबाव बताया, जबकि डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस वैन होलन ने इसे स्पष्ट युद्ध अपराध करार दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले कानूनी रूप से संभव होने पर भी दीर्घकाल में अमेरिका के खिलाफ जनमत और संघर्ष दोनों को और कठोर बना सकते हैं।