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ईरान पर हमले के लिए बेताब थे ट्रंप, बढ़ा-चढ़ाकर किए थे दावे; अब सामने आ गई सारी सच्चाई

Published: Sun, 01 Mar 2026 11:50 PM (IST)

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने के लिए कई दावे किए ...और पढ़ें

ईरान पर हमले के लिए ट्रंप ने बढ़ा-चढ़ाकर किए थे दावे(फाइल फोटो)

ईरान पर हमले के लिए ट्रंप ने बढ़ा-चढ़ाकर किए थे दावे(फाइल फोटो)

HighLights

  1. यूएसएस कोल हमले में ईरान की सीधी संलिप्तता नहीं मिली

  2. परमाणु केंद्रों के पूर्ण विनाश का दावा बढ़ा-चढ़ाकर था

  3. ईरान से अमेरिकी मिसाइल खतरे को अतिरंजित बताया

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को उचित ठहराया, लेकिन तथ्यों की पड़ताल से पता चला कि ट्रंप ने अपने कदम को सही ठहराने के लिए बढ़ाचढ़ाकर दावे किए।

ट्रंप द्वारा इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में किए गए प्रमुख दावे तथ्यों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। आइए जानने का प्रयास करते हैं कि ट्रंप ने क्या दावे किए थे और उसकी सच्चाई क्या है।

ट्रंप ने कहा था - साल 2000 में यूएसएस कोल पर हुए हमले के बारे में ईरान सरकार जानती थी और संभवत: उसमें शामिल भी थी।

ईरान ने करवाई थी पोत यूएसएस कोल पर हमला

तथ्य: इस दावे के कोई प्रमाण नहीं हैं। अल-कायदा ने अक्टूबर 2000 में अमेरिकी विध्वंसक पोत यूएसएस कोल पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने भी इसकी पुष्टि की है।

इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि ईरान इस हमले के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था, लेकिन वर्षों से, अमेरिकी अदालतों ने ईरान को हमले के पीडि़तों और उनके स्वजन को करोड़ों डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया है, यह मानते हुए कि ईरान ने अल-कायदा को सामग्री और वित्तीय सहायता देकर हमले में सहयोग दिया था।

एफबीआई ने अपनी वेबसाइट पर हमले का विवरण देते हुए बताया है कि अल-कायदा आतंकियों ने विस्फोट की साजिश रची और उसे अंजाम दिया। इसमें ईरान का कोई जिक्र नहीं है। हालांकि 2015 में संघीय न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि ईरान इस हमले में शामिल था। ईरान के समर्थन के कारण अल-कायदा यूएसएस कोल पर हमला कर सका।

संभवत: हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक ने बमबारी से पहले और बाद में ईरान की यात्रा की थी। यह मुकदमा हमले में मारे गए एक नाविक के परिवार द्वारा ईरान और सूडान के खिलाफ दायर किया गया था; दोनों देशों ने मुकदमे का जवाब नहीं दिया।

इसी तरह के एक दीवानी मामले में संघीय न्यायाधीश ने 2024 में फैसला सुनाया कि ईरान ने अल-कायदा को दशकों तक सहायता देकर ''कोल पर हमले की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में मदद की।

ट्रंप ने कहा था- पिछले साल आपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत फोर्डो, नतांज और इस्फहान में ईरान के परमाणु केंद्रों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था

ईरान की परमाणु केंद्रों को बनाया निशाना

तथ्य: यह बढ़ाचढ़ाकर किया गया दावा है। पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान की परमाणु केंद्रों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए थे, लेकिन सरकारी रिपोर्टों और अन्य अधिकारियों ने ट्रंप के पूर्ण विनाश के दावों जितनी बात नहीं कही है।

हमले के कुछ दिनों बाद न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया कि प्रारंभिक आकलन में पाया गया कि हमलों में ईरान परमाणु केंद्रों की भूमिगत इमारतों को ध्वस्त नहीं किया था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रासी ने सीबीएस को बताया कि था कि हमलों से ''गंभीर क्षति हुई है, लेकिन यह पूर्ण विनाश नहीं है।

पेंटागन के प्रवक्ता ने पिछले अगस्त में इसी बात को दोहराते हुए कहा कि हमलों ने ईरान की क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। पिछले नवंबर में प्रकाशित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में अधिकारियों ने कहा कि जून के हवाई हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी हद तक कमजोर कर दिया।

ट्रंप ने कहा था- ईरान ने परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू करने और लंबी दूरी की मिसाइलों को बनाने का प्रयास किया, जो अब यूरोप में हमारे दोस्तों और सहयोगियों, विदेश में तैनात हमारी सेनाओं के लिए खतरा बन सकती हैं और जल्द ही अमेरिका तक पहुंच सकती हैं।

तथ्य: इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है।

खुफिया जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि ईरान के मिसाइल से अमेरिका को होने वाले खतरे की गंभीरता को ट्रंप ने बढ़ा-चढ़ाकर बताया। ईरान द्वारा परमाणु बम बनाने की कोशिश की बात का भी आधार नहीं है। हालांकि ट्रंप का यह कहना सही है कि ईरान के मौजूदा मिसाइल जखीरे से यूरोप के कुछ हिस्सों और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक हमला किया जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञ और आधिकारिक रिपोर्ट इस बात पर संदेह जताते हैं कि ईरान की मिसाइलें अमेरिका तक पहुंच सकती हैं।

रक्षा खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास अभी तक ऐसी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें नहीं थीं जो अमेरिका तक पहुंच सकें, हालांकि वह 2035 तक ऐसी 60 मिसाइलें विकसित कर सकता है।

राफेल ग्रासी ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी समाचार नेटवर्क को बताया कि उनकी एजेंसी को इस बात का कोई साक्ष्य नहीं मिला है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की साजिश रच रहा है। अधिकारियों ने पिछले सप्ताह बताया कि जून में हुए हमलों के बाद से ईरान ने कोई नया परमाणु अड्डा नहीं बनाया है, हालांकि मौजूदा अड्डों पर हाल ही में कुछ गतिविधि देखी गई है।