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ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' दावे की निकली हवा, जिन 6 टेक दिग्गजों को दिया सम्मान; उनमें से 5 US से बाहर जन्मे

Published: Fri, 09 Oct 2026 02:55 PM (GMT+05:30)

राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में 6 तकनीकी दिग्गजों को सम्मानित किया, जिनमें से 5 विदेशी मूल के थे, जो अमेरिकी नवाचार में विदेशी प्रतिभा के महत्व को दर्शाता है।

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HighLights

  1. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में 6 टेक दिग्गजों को सम्मानित किया।

  2. अमेरिकी नवाचार में विदेशी प्रतिभा की महत्वपूर्ण भूमिका उजागर हुई।

  3. सत्या नडेला को सम्मान और H-1B वीजा विवाद दोनों मिले।

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। व्हाइट हाउस में अमेरिकी टेक्नोलॉजी की महानता का जश्न मनाते हुए एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने देश के सर्वोच्च विज्ञान और प्रौद्योगिकी सम्मान के लिए 6 टेक्नोलॉजी दिग्गजों को नवाजा। हालांकि इस समारोह में सम्मान पाने वाले 6 वैज्ञानिकों में से 5 अमेरिका के बाहर के रहने वाले थे। इस पूरी सूची में एकमात्र अपवाद डेल टेक्नोलॉजीज के संस्थापक माइकल डेल थे। जिनका जन्म टेक्सस में हुआ था।

टेक की हस्तियों को दो शीर्ष नागरिक सम्मान दिए

साइंस ए न्यू गोल्डन एज नाम के इस समारोह में राष्ट्रपति ट्रंप ने टेस्ला के एलन मस्क, गूगल के सह संस्थापक सर्गेई ब्रिन, एनवीडिया के प्रमुख जेन्सेन हुआंग और AMD की CEO लिसा सु को नेशनल मेडल ऑफ साइंस प्रदान किया गया। माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला और डेल को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मिला।

अमेरिका फर्स्ट और विदेशी प्रतिभाओं का विरोधाभास

यह सम्मान समारोह सिलिकॉन वैली और अमेरिकी टेक उद्योग की उस पुरानी सच्चाई को रेखांकित करता है जिस पर अमेरिका का वैश्विक दबदबा टिका है। अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता केवल स्थानीय प्रतिभाओं के बल पर नहीं, बल्कि दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करने, उन्हें शिक्षित करने और अपने देश में रोके रखने की क्षमता से बनी है।

यह संदेश उस प्रशासन के लिए थोड़ा असहज है जो अपनी राजनीतिक कहानी में विदेशी कर्मचारियों को विलेन के तौर पर पेश करने पर तुला हुआ है।

वेंस का तर्क है कि विदेशी कर्मचारी अमेरिकियों की जगह ले सकते हैं और एम्प्लॉयर्स के सामने कमजोर स्थिति में हो सकते हैं क्योंकि उनका इमिग्रेशन स्टेटस उनकी नौकरी से जुड़ा होता है।

हालांकि टेक एग्जीक्यूटिव मानते हैं कि जहां कंपनियां वीजा प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल करती हैं, वहां चिंता पर गौर किया जाना चाहिए लेकिन विदेशी टैलेंट के प्रति पूरी तरह से दुश्मनी का रवैया रखना गलत है वो भी तब जब प्रशासन उन एग्जीक्यूटिव्स की तारीफ करता है जिनकी उपलब्धियों ने अमेरिकी कंपनियों को ग्लोबल लीडर बनाने में मदद की है।

इवेंट के बाद इंडस्ट्री के एक जानकार ने तंज कसते हुए कहा, 'विदेशी कर्मचारी ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करते समय समस्या होते हैं लेकिन मेडल लेते समय देश की धरोहर बन जाते हैं।'

माइक्रोसॉफ्ट CEO सत्या नडेला के लिए अजीब दिन

माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला के लिए गुरुवार का दिन बेहद विरोधाभासी रहा। सुबह उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कंपनी अमरेकी कर्मचारियों की छंटनी कर रही है और H-1B वीजा तथा ग्रीन कार्य कार्यक्रमों का गलत इस्तेमाल कर रही है।

वेंस ने घोषणा की कि प्रशासन कंपनी को योग्य विदेशी कर्मचारियों को स्थाई निवास प्रयोजित करने वाले कार्यक्रम से निलंबित कर रहा है। कंपनी ने इस बात का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि उसके वीजा आवेदन नए लोगों को लाने के बजाय मौजूदा योग्य कर्मचारियों के लिए थे।

इस पूरे विवाद के कुछ घंटों बाद ही नडेला व्हाइट हाउस में थे। उन्हें अमेरिका की सबसे अहम टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक को बनाने में मदद करने के लिए प्रेसिडेंशियल मेडल मिल रहा था। राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें 'नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन' से सम्मानित किया गया था ।

नडेला के लिए सम्मान पत्र में उनकी एक अहम अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी की ऐसी लीडरशिप की तारीफ की गई, जिसने क्लाउड कंप्यूटिंग के नए दौर के लिए कंपनी को नई जान दी। साथ ही हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में उनकी भूमिका को भी सराहा गया, जिसने अमेरिकी सुपर इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग और ग्लोबल लेवल पर इस्तेमाल को मुमकिन बनाया गया।

यह हैदराबाद में जन्मे एग्जीक्यूटिव द्वारा माइक्रोसॉफ्ट को क्लाउड-कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल-इंटेलिजेंस के पावरहाउस में बदलने के लिए एक बड़ा सम्मान था।

ताइवान के दिग्गजों का सम्मान और जियोपॉलिटिक्स

जेन्सेन हुआंग और लिसा सु ने एक और दिलचस्प बात सामने रखी, जिसमें जियोपॉलिटिकल पहलू भी शामिल था। दोनों दूर के रिश्तेदार हैं और दोनों का जन्म ताइवान में हुआ था। हुआंग ने एनवीडिया (Nvidia) को AI कंप्यूटिंग में सबसे बड़ी ताकत बनाया है। जबकि सु ने हाई-परफॉर्मेंस प्रोसेसर के क्षेत्र में AMD को एक मजबूत कॉम्पिटिटर के तौर पर फिर से खड़ा किया है।

उनकी उपलब्धियां दिखाती हैं कि कैसे ताइवान में जन्मे इंजीनियरिंग टैलेंट ने उन टेक्नोलॉजी को आकार देने में मदद की है जिन पर अमेरिका की आर्थिक और रणनीतिक महत्वाकांक्षाएं तेजी से निर्भर होती जा रही हैं।

दोनों दिग्गजों को ये सम्मान ऐसे समय में मिला है जब ट्रंप बीजिंग के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। विदेश नीति के कुछ जानकारों को चिंता है कि चीन के साथ रिश्तोम में लेन-देन वाला नजरिया अपनाने या किसी बड़े समझौते के लिए रियायतें देने से ताइवान की सुरक्षा के प्रति अमेरिका के वादे की विश्वसनीयता कम हो सकती है। हालांकि मेडल सेरेमनी से ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में किसी बदलाव का संकेत नहीं मिला है।

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