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ट्रंप-शी चिनफिंग बैठक: कौन रखता है ज्यादा ताकत? इन पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं में समझें

Published: Thu, 24 Sep 2026 12:28 AM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 24 सितंबर को वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं। दोनों नेताओं के पास अपने-अपने ताकतवर कार्ड हैं।

ट्रंप और शी चिनफिंग 24 सितंबर को वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं

ट्रंप और शी चिनफिंग 24 सितंबर को वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं

HighLights

  1. ट्रंप शी चिनफिंग पर डॉलर और प्रतिबंधों को लेकर चर्चा कर सकते हैं

  2. दोनों नेताओं के बीच टैरिफ को लेकर चर्चा हो सकती है

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 24 सितंबर को वाशिंगटन में मुलाकात करने वाले हैं। दोनों नेताओं के पास अपने-अपने ताकतवर कार्ड हैं। यह बैठक सिर्फ हैंडशेक नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्विता के अगले चरण को तय कर सकती है।

ट्रंप टैरिफ की धमकी दे सकते हैं, अमेरिकी प्रौद्योगिकी तक चीन की पहुंच को सीमित कर सकते हैं और दुनिया की सबसे शक्तिशाली वित्तीय प्रणाली का इस्तेमाल कर सकते हैं।

शी चिनफिंग चीन के विशाल विनिर्माण आधार, दुर्लभ खनिजों पर उसकी पकड़ और उन देशों के साथ उसके आर्थिक संबंधों के माध्यम से जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं जिन पर वाशिंगटन दबाव बनाना चाहता है।

आधी सदी से भी अधिक समय बाद, सवाल यह नहीं है कि कौन अधिक शक्तिशाली है। सवाल यह है कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर किसके पास बेहतर स्थिति है। ट्रंप और शी चिनफिंग के पास ये पांच विकल्प हैं...

1. व्यापार: ट्रंप के टैरिफ बनाम शी की मजबूती

ट्रंप का सबसे बड़ा हथियार अमेरिकी बाजार है। वे टैरिफ बढ़ाकर चीन पर दबाव बना सकते हैं। नवंबर में मौजूदा व्यापार युद्धविराम खत्म होने वाला है, जो ट्रंप को और मजबूती देता है।

शी का जवाब है आर्थिक लचीलापन। चीन ने अमेरिकी बाजार का नुकसान झेलते हुए अन्य देशों में निर्यात बढ़ाया है। घरेलू मांग कमजोर होने के बावजूद चीन 4.5-5% विकास लक्ष्य हासिल करना चाहता है, इसलिए स्थिरता भी उसके लिए जरूरी है।

2. रेयर अर्थ: चीन की पकड़ बनाम अमेरिका के विकल्प

चीन वैश्विक रेयर अर्थ खनन का 70% और रिफाइनिंग का 85% से ज्यादा हिस्सा नियंत्रित करता है। इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए यह जरूरी है। चीन निर्यात में देरी या प्रतिबंध लगाकर दबाव बना सकता है। अमेरिका वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला बनाने की कोशिश में है, लेकिन इसमें साल लगेंगे।

3. एआई और चिप्स: अमेरिका की बढ़त बनाम चीन की पकड़


अमेरिका एडवांस्ड चिप्स और एआई तकनीक में आगे है। ट्रंप चीन को एडवांस्ड चिप्स की पहुंच सीमित कर सकते हैं। लेकिन चीन घरेलू विकल्प (जैसे हुआवेई के चिप्स) विकसित कर रहा है। अगर चीन आत्मनिर्भर होता गया तो अमेरिका का यह कार्ड कमजोर पड़ सकता है।

4. ताइवान: अमेरिकी सुरक्षा कवच बनाम चीन की लाल रेखा

ताइवान दोनों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दा है। अमेरिका ताइवान को हथियार बेचता है (14 अरब डॉलर का प्रस्तावित पैकेज चर्चा में है)। शी ने पहले ही चेतावनी दी है कि ताइवान मुद्दे को गलत तरीके से संभालने पर संबंध खतरनाक स्तर पर पहुंच सकते हैं।

5. रूस और ईरान: अमेरिकी प्रतिबंध बनाम चीन के रिश्ते

अमेरिका डॉलर और प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना सकता है। लेकिन चीन रूस से ऊर्जा खरीदता है और ईरान से आर्थिक संबंध रखता है। इससे वह अमेरिकी दबाव का मुकाबला कर सकता है।