'ईरान के पास तैनात रहेगी सेना', ट्रंप ने NATO को क्यों लताड़ा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान NATO की भूमिका पर नाराजगी जताई है। उन्होंने NATO ...और पढ़ें
HighLights
ट्रंप ने ईरान संघर्ष पर NATO की भूमिका पर नाराजगी जताई।
NATO देशों ने अमेरिकी सैन्य अभियान का समर्थन करने से इनकार किया।
अमेरिकी सेना ईरान में 'असली समझौता' लागू होने तक रहेगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान NATO की भूमिका को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नाराजगी जाहिर की है। ट्रंप ने NATO सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि जब तक उन पर दबाव नहीं डाला जाता, तब तक वे महत्वपूर्ण मुद्दों को समझने में नाकाम रहते हैं।
NATO पर ट्रंप का गुस्सा
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में डोनल्ड ट्रंप ने सहयोगी देशों के रवैये पर अपनी निराशा जाहिर की। ट्रंप ने लिखा, 'इनमें से किसी भी व्यक्ति ने, यहां तक कि हमारे अपने लोग और NATO भी, तब तक कुछ नहीं समझा, जब तक उन पर दबाव नहीं डाला गया'

NATO देशों ने सैन्य अभियान से किया मना
कई NATO देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का समर्थन करने से इनकार कर दिया। उन्होंने अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में मदद के लिए नौसेना बल भेजने से भी मना कर दिया।
अमेरिका को उनकी जरूरत पड़ी तो वे नहीं थे: ट्रंप
NATO महासचिव मार्क रुट्ट ने देशों का नाम लिए बिना कहा कि उनका मानना है कि कुछ NATO सदस्य ईरान अभियान में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नाकाम रहे, हालांकि ज्यादातर यूरोपीय देश मददगार साबित हुए। ट्रंप ने इस पूरे मामले में NATO सहयोगियों पर साफ तौर पर नाराजगी जताई और कहा कि जब अमेरिका को उनकी जरूरत पड़ी, तो वे वहां नहीं थे।
ईरान में तैनात रहेंगे जहाज
इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि US सेना अपनी अगली जीत का इंतजार कर रही है। गुरुवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'हमारी सेना तैयारी अपनी अगली जीत का इंतजजार कर रही है।'
ट्रंप ने इस पोस्ट के जरिए ऐलान किया कि US के सभी जहाज, विमान और सैन्यकर्मी अपने गोला-बारूद और हथियारों के साथ ईरान में तब तक रहेंगे जब तक कि असली समझौता पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता।
उन्होंनेलिखा, 'US के सभी जहाज, विमान और सैन्यकर्मी, गोला-बारूद और हथियार के साथ ईरान और उसके आस-पास तब तक रहेंगे, जब तक कि हुआ असली समझौता पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता। अगर किसी भी वजह से ऐसा नहीं होता है तो गोलीबारी शुरू हो जाएगी।'
