मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का 'रूसी रूलेट', पुतिन के साथ डील कर खेला नया दांव
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत के लिए रूस से डीजल आयात की अनुमति दी है।

मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का 'रूसी रूलेट'। (रॉयटर्स)
HighLights
ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव से पहले रूस से डीजल आयात को मंजूरी दी।
यह कदम अमेरिकी ईंधन कीमतों को कम करने का प्रयास है।
आलोचकों ने रूस को आर्थिक लाभ और यूक्रेन के साथ विश्वासघात बताया।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। मिडटर्म चुनाव से कुछ हफ्ते पहले अमेरिका में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। ऐसे में, राहत पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक ऐसे देश की ओर रुख किया, जिसकी उम्मीद शायद ही किसी को थी, वो है रूस।
यूक्रेन युद्ध के कारण वाशिंगटन ने कई सालों से रूस पर प्रतिबंध लगा रखे हैं, लेकिन अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत रूस को अमेरिका और वैश्विक बाजारों में डीजल की आपूर्ति करने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला ट्रंप और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई फोन पर बातचीत के बाद लिया गया।
व्हाइट हाउस का कहना है कि इस कदम से अमेरिकी किसानों, ट्रक ड्राइवरों और परिवारों के लिए ईंधन की लागत कम करने में मदद मिलेगी। लेकिन आलोचकों का तर्क है कि इस सौदे से रूस को पैसा मिलने का खतरा है, जबकि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलेगी।
यह समय राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है, क्योंकि अमेरिकी जनता 3 नवंबर को नई कांग्रेस चुनने की तैयारी कर रही है, और बढ़ती महंगाई एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
ट्रंप के लिए, इसका राजनीतिक हिसाब-किताब काफी सीधा है। अगर रूस से ईंधन की आपूर्ति जल्दी और पर्याप्त मात्रा में मिल जाती है, तो इससे ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं और उनकी पार्टी को राजनीतिक फायदा मिल सकता है। लेकिन अगर आपूर्ति कम रहती है या कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो प्रशासन रूस को तो बड़ी आर्थिक राहत दे देगा, जबकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।
रूसी डीजल से कितना फर्क पड़ सकता है?
11 अक्टूबर को डीजल की औसत कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन थी, जो एक साल पहले की तुलना में 71% अधिक है।
ईंधन की कीमतों पर नजर रखने वाली संस्था 'अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन' के अनुसार, 16 अक्टूबर को यह औसत कीमत 6.33 डॉलर थी।
इसका असर सिर्फ वाहन चालकों तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि डीजल का इस्तेमाल उन ट्रकों में भी होता है जो सामान ढोते हैं, किसानों के ट्रैक्टरों में होता है, और दुनिया भर में माल ले जाने वाले कार्गो जहाजों में भी होता है। जब डीजल महंगा होता है, तो भोजन और अन्य जरूरी चीजों के परिवहन की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू खर्चों पर पड़ता है।
22 अक्टूबर को रूस भेजेगा डीजल की पहली खेप
रूस ने 21 अक्टूबर को कहा कि वह अगले दिन अमेरिका को डीजल की अपनी पहली खेप भेजेगा, जिसमें 40,000 मीट्रिक टन ईंधन होगा। और भी खेप भेजने की योजना है, हालांकि इस पर सवाल बने हुए हैं कि क्या मॉस्को इतनी मात्रा में डीजल पहुंचा पाएगा जिससे कीमतों में कोई बड़ा बदलाव आ सके। हालांकि, ये आंकड़े इस समझौते की सीमाओं को दर्शाते हैं।
एक महीने के दौरान आने वाली दूसरी खेप का मतलब होगा, प्रतिदिन लगभग 124,000 बैरल। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म 'केप्लर' का अनुमान है कि वैश्विक स्तर पर डीजल की कमी प्रतिदिन लगभग एक मिलियन बैरल है। इसलिए, योजना के अनुसार भेजी जाने वाली खेप इस कमी का केवल आठवां हिस्सा ही पूरा कर पाएगी। और इस बात की भी कोई गारंटी नहीं है कि रूस वादा की गई मात्रा में डीजल पहुंचा पाएगा।
भले ही रूसी डीजल बाजार तक पहुंच जाए, लेकिन थोक कीमतों में कमी का मतलब यह नहीं है कि अमेरिकियों को तुरंत सस्ता ईंधन मिलने लगेगा। रिफाइनिंग क्षमता, परिवहन लागत और डिलीवरी में लगने वाला समय, इन सब बातों से यह तय होगा कि उपभोक्ताओं को कितनी जल्दी राहत मिल पाती है।
मॉस्को के लिए एक लाइफ लाइन
हालांकि अमेरिकी उपभोक्ताओं को इससे क्या फायदा होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस फैसले से रूस को तुरंत एक बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे उसे ईंधन बेचने का एक ऐसा रास्ता मिल जाएगा, जो प्रतिबंधों के कारण बंद हो गया था। ट्रेजरी का यह लाइसेंस 7 अप्रैल, 2027 तक वैध रहेगा।
यह अवधि प्रतिबंधों में दी जाने वाली सामान्य 30 दिनों की छूट से कहीं अधिक लंबी है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह पहली बार है, जब डीजल के मामले में दी गई छूट की अवधि इस मानक समय-सीमा से आगे बढ़ाई गई है।
चुनाव का दबाव बढ़ने के साथ रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद सामने आए
इस फैसले के विरोध ने ट्रंप की अपनी ही पार्टी के भीतर के मतभेदों को उजागर कर दिया है। रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स, लिसा मुर्कोव्स्की, मिच मैककोनेल, जॉन कॉर्निन और थॉम टिलिस ने इस समझौते की आलोचना करने में डेमोक्रेट्स का साथ दिया।
उन्होंने इसे यूक्रेन के साथ विश्वासघात और एक विरोधी को दिया गया तोहफा बताया। कांग्रेस सदस्य ब्रायन फिट्जपैट्रिक ने इस खरीद को रोकने के लिए 'हाउस' में मतदान कराने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि इस कदम को भारी समर्थन मिलेगा। प्रतिबंधों से जुड़े कानून के सह-प्रायोजक, सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने भी प्रशासन के इस फैसले की निंदा की है।
