'चलो फ्रांस चलते हैं', ट्रंप ने देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों और हिंसा का उड़ाया मजाक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस में बढ़ती महंगाई के कारण हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों का उपहास किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से फ्रांस को 'क्रांतियों के लिए बेहतरीन जगह' बताया।

ट्रंप ने फ्रांस विरोध-प्रदर्शनों और हिंसा का उड़ाया मजाक। (रॉयटर्स)
HighLights
ट्रंप ने फ्रांस में फैली अशांति का मजाक उड़ाया।
बढ़ती महंगाई के कारण हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन।
उपराष्ट्रपति वेंस ने आव्रजन को हिंसा का कारण बताया।
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने फ्रांस में फैली इस हिंसा अशांति का मजाक उड़ाते हुए कहा कि यह देश मानो क्रांतियों के लिए ही बना है। बढ़ती मंहगाई को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, लूटपाट हुई और आगजनी की घटनाएं देखी गईं।
फ्रांस के हालात पर मजाक करके हुए ट्रंप ने कहा, 'चलो फ्रांस चलते है? यह एक बहुत प्यारी जगह है। वहां कोई दंगे नहीं होते, कोई क्रांति नहीं होती। वैसे, फ्रांस तो क्रांतियों के लिए एकदम बेहतरीन जगह मिलती है। यकीन ही नहीं होता, चलो फ्रांस चलते हैं और क्रांति में शामिल होते हैं।'
फ्रांस मे भड़की हिंसा
ट्रंप की यह टिप्पणी तब आई जब रविवार सुबह फ्रांस में लोग जागे तो उन्होंने सड़कों पर भारी तबाही देखी, जो शनिवार को हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों का नतीजा थी। यह अशांति कई हफ्तों तक चले छात्र-विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुई है, और यह घटना राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यकाल के बाद होने वाले चुनावों से ठीक छह महीने पहले सामने आई है।
हिंसा के लिए आव्रजन जिम्मेदार- वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हिंसा पर अपनी राय रखी। उन्होंने इसके लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया और तर्क दिया कि फ्रांस और अन्य पश्चिमी देश, लोगों को समाज में शामिल करने और उनके बीच तालमेल बिठाने के मुद्दे को सुलझाने में विफल रहे हैं।
एक्स पर एक पोस्ट में वेंस ने कहा, 'पश्चिमी उदारवादियों ने विविधता और करुणा के नाम पर 'तीसरी दुनिया' के लोगों को फ्रांस और अन्य देशों में लाकर बसा दिया। उन्होंने समाज में घुलने-मिलने और तालमेल बिठाने जैसे बुनियादी सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।'
पूरे फ्रांस में विरोध-प्रदर्शन हिंसक हुए
शनिवार को फ्रांस में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए। बढ़ती महंगाई के खिलाफ हो रहे इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, बड़े पैमाने पर लूटपाट हुई और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
यह हिंसा पेरिस और अन्य शहरों में बढ़ती महंगाई के खिलाफ निकाले गए मार्च के दौरान भड़की। गृह मंत्रालय के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 5,50,000 लोग शामिल हुए, जबकि इसमें हिस्सा लेने वाले CGT यूनियन ने यह आंकड़ा 8,00,000 बताया है। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर और आतिशबाजी फेंकी, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने बताया कि शहर की कई सड़कें पूरी तरह तबाह हो गई हैं। नकाबपोश युवाओं के समूहों ने खड़ी कारों में आग लगा दी और दुकानों में तोड़फोड़ की।
(समाचार एजेंसी एएफपी के इनपुट के साथ)
