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48 घंटे के अल्टीमेटम से 5 दिन के विराम तक... कैसे बदलते गए ट्रंप के सुर, क्या ईरान के साथ हो रही डील? Inside Story

Published: Mon, 23 Mar 2026 09:53 PM (IST)Updated: Mon, 23 Mar 2026 11:22 PM (IST)

ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, धमकी दी थी कि ऐसा ...और पढ़ें

ट्रंप की बातों में अब फर्क दिखने लगा है

ट्रंप की बातों में अब फर्क दिखने लगा है

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संक्षेप में पढ़ें

स्वराज श्रीवास्तव। शुरुआत दो दिन पहले दिए ट्रंप के उस अल्टीमेटम से करते हैं, जब उन्होंने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में होर्मुज नहीं खुला, तो वह उनके पावर प्लांट्स पर हमला कर देंगे। लेकिन 48 घंटे बीते भी और होर्मुज खुला भी नही।

अब ट्रंप तो ट्रंप हैं। अपनी छवि बेहतर बनाने और खुद का दुनिया का रक्षक साबित करने के जुनून में कुछ भी दावे कर जाने वाले ट्रंप ने एक और दावा कर दिया। ट्रंप ने कह दिया कि अमेरिका की ईरान से बात चल रही है और वह समझौते के लिए तैयार हो गया है, इसलिए अब उसके पावर प्लांट्स पर हमला नहीं किया जाएगा।

ईरान ने ट्रंप के दावे किए खारिज

बात यहीं खत्म हो जाती तो फिर बात ही क्या होती। ट्रंप के इस दावे के साथ ईरान भी अड़ गया और उसने साफ तौर पर कह दिया कि अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई भी बातचीत नहीं हो रही है और ट्रंप के दावे सिर्फ हवा-हवाई हैं।

trump iran talk

काबुल में स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि ट्रंप ने सिर्फ इसलिए अपने हाथ युद्ध से पीछे खींच लिए क्योंकि वह ईरान की कड़ी चेतावनी से डर गए थे। दरअसल ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर उसके पावर प्लांट पर हमले हुए तो वह मिडिल ईस्ट को पानी के लिए भी तरसा देगा।

बदल गए हैं ट्रंप सुर

वजह चाहें जो भी हो, लेकिन ये तो स्पष्ट है कि ट्रंप के सुर अचानक से बदल गए हैं। कभी ईरान को छिन्न-भिन्न कर देने का दम भरने वाले ट्रंप अब ईरान के साथ समझौते जैसी बातें करने लगे हैं। ट्रंप के स्वभाव में आए इस परिवर्तन को समझने से पहले आपको ट्रंप के बयानों पर एक नजर डालनी पड़ेगी।

trump iran deal

सबसे पहले ट्रंप ने अपने तेवर में कहा था कि यदि ईरान बिना किसी खतरे के 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका उनके विभिन्न बिजली संयंत्रों पर हमला करेगा और उन्हें पूरी तरह से नष्ट कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी!

बदल रहे हैं ट्रंप के बयान

ट्रंप के बयान के बाद ईरान का जवाब आया। ईरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय उनके जो उसके 'दुश्मनों' से जुड़े हैं। जाहिर तौर पर ईरान का इशारा अमेरिका और इजरायल की तरफ था। इसके बाद दुनियाभर की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि होर्मुज पर ईरान क्या फैसला लेगा।

trump hormuz open

कैलेंडर में तारीख बदली और इस तरह 48 घंटे का अल्टीमेटम खत्म हो गया। इसके बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट किया, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई है। इन गहन और विस्तृत बातचीत के लहजे और स्वर के आधार पर, जो पूरे सप्ताह जारी रहेगी, मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वह ईरानी बिजली संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ किसी भी और सभी सैन्य हमलों को पांच दिनों की अवधि के लिए स्थगित कर दे। यह निर्णय चल रही बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा।'

क्यों आया इतना परिवर्तन?

सेंट पीटर्सबर्ग के मौसम की तरह बदलते ट्रंप के रवैये के पीछे कुछ प्रमुख वजहें हैं। पहली वजह तो ये है कि ट्रंप को भरोसा नहीं था कि ईरान का युद्ध इतना लंबा खिंच जाएगा। शायद ट्रंप और उनकी टीम इसका अंदाजा लगाने से चूक गई। इसके अलावा ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप अपने घर में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अकेले पड़ गए हैं।

ट्रंप ईरान युद्ध में जमकर पैसे बहा रहे हैं और उनकी अतिरिक्त फंड की मांग को सीनेट ने ठुकरा दिया है। अमेरिका में एक धड़ा ऐसा भी है, जो यह साबित करने में लगभग कामयाब रहा है कि यह इजरायल का युद्ध है और ट्रंप ने अमेरिका को इसमें जबरदस्ती झोंका हुआ है। दूसरी ओर ईरान भी अड़ा हुआ है और इस वजह से दुनियाभर में ऊर्जा का संकट खड़ा हो गया है, जिसके लिए ट्रंप को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

अब ट्रंप की ईरान के साथ डील वाली बातों में कितनी सच्चाई है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन ये बात को साफ है कि ट्रंप को अब दिखने लगा है कि ईरान से पार पाना इतना भी आसान नहीं है, जितना उन्होंने सोचा था।

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