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ट्रंप ने एच-1बी वीजा छूट को समाप्त करने की दिशा में बढ़ाया कदम, भारतीय टेक पेशेवरों पर मंडराया खतरा

Published: Fri, 30 Oct 2026 05:34 AM (IST)

कई भारतीय प्रोफेशनल एसी21 के तहत तीन साल के एक्सटेंशन पर निर्भर रहते हैं। अभी हर रिन्यूअल में पिछले अप्रूवल ...और पढ़ें

ट्रंप के सख्त आव्रजन कदमों से भारत लौट सकते हैं हजारों अनुभवी टेक पेशेवर

ट्रंप के सख्त आव्रजन कदमों से भारत लौट सकते हैं हजारों अनुभवी टेक पेशेवर

HighLights

  1. ट्रंप के सख्त आव्रजन कदमों से भारत लौट सकते हैं हजारों अनुभवी टेक पेशेवर

  2. लगभग 10 लाख भारतीय रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हैं

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा एक्सटेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण नीति को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। इसे “डिफरेंस टू प्रायर अप्रूवल्स” कहा जाता है। अगर यह लागू होता है तो ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है।

क्या है डिफरेंस पॉलिसी?

अभी तक अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवाएं जब उसी नियोक्ता, उसी कर्मचारी और समान तथ्यों वाली एक्सटेंशन याचिका की समीक्षा करती है, तो पहले के मंजूरी वाले फैसले को महत्व देती है। सिर्फ खास परिस्थितियों (जैसे गंभीर गलती, बदलाव या नई जानकारी) में ही इसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

प्रस्तावित बदलाव के तहत अधिकारी पहले के फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं रहेंगे। हर एक्सटेंशन याचिका को नए सिरे से जांचा जा सकता है। यह प्रस्ताव 14 अक्टूबर को प्रकाशित हुआ है और अभी अंतिम नियम नहीं बना है।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर असर

भारतीय H-1B होल्डर्स में सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। USCIS डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कुल H-1B लाभार्थियों में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत थी।

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के विश्लेषण के मुताबिक, लगभग 10 लाख भारतीय रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड बैकलॉग में फंसे हैं, जो कुल का करीब 79 प्रतिशत है।

कई भारतीय प्रोफेशनल एसी21 के तहत तीन साल के एक्सटेंशन पर निर्भर रहते हैं। अभी हर रिन्यूअल में पिछले अप्रूवल को सही माना जाता है। नए नियम में हर बार स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन, वेज लेवल और नियोक्ता-कर्मचारी संबंध की दोबारा जांच हो सकती है।

इमिग्रेशन अटॉर्नी भुमि रेड्डी साई श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि यह ग्रीन कार्ड इंतजार की प्रकृति ही बदल सकता है। राजिव दभड़कर के अनुसार, यह ग्रीन कार्ड कतार की स्थिति नहीं बदलेगा, लेकिन बाद की याचिकाओं के आकलन को प्रभावित कर सकता है।

अतिरिक्त जांच और कागजी कार्रवाई

नियोक्ताओं को जॉब ड्यूटीज, मुआवजा, वर्क लोकेशन, बिजनेस ऑपरेशंस और योग्यता संबंधी ज्यादा दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं। डीएचएस का अनुमान है कि इससे सालाना करीब 6,044 अतिरिक्त रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस और लगभग 1.34 लाख डॉलर अतिरिक्त लागत आ सकती है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मौजूदा नीति गलत मंजूरियों को जारी रखने और धोखाधड़ी वाले मामलों को पकड़ने में बाधा डालती है। इससे अधिकारी हर मामले में स्वतंत्र रूप से तथ्यों और सबूतों की जांच कर सकेंगे।