ट्रंप का चिनफिंग को गले लगाना, शरीफ की तारीफ; भारत के लिए क्यों मायने रखता है बदलता समीकरण?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से नजदीकी रिश्ते और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ...और पढ़ें

ट्रंप का शी से गले मिलना और शरीफ की तारीफ, भारत पर दबाव बढ़ने की आशंका
HighLights
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर शरीफ के भाषण का 87 सेकंड का अंश बिना किसी टिप्पणी के पोस्ट किया
शहबाज की ट्रंप से नजदीकी से भारत को लगता है कि वह रणनीतिक रूप से दबाव में आ रहा है
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। हाल ही में चीन के राष्ट्रपति चिनफिंग अमेरिका के दौरे पर आए और इस दौरे पर भारत की पैनी नजर थी।
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से नजदीकी रिश्ते और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तारीफ करने से भारत-अमेरिका संबंधों में नई दरार के संकेत साफ दिख रहे हैं। भारत को लगता है कि वह रणनीतिक रूप से दबाव में आ रहा है।
इस सप्ताह ट्रंप ने व्हाइट हाउस और संयुक्त राष्ट्र में ऐसे कदम उठाए, जो भारत के लिए चिंता का विषय बन गए। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र करते हुए ट्रंप के समय पर हस्तक्षेप की तारीफ की, जिससे बड़े युद्ध को रोका गया।
शुक्रवार रात, शी चिनफिंग के बीजिंग लौटने के कुछ समय बाद, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर शरीफ के भाषण का 87 सेकंड का अंश बिना किसी टिप्पणी के पोस्ट किया। इसमें शरीफ की ट्रंप और पाकिस्तान सेना प्रमुख असीम मुनीर की प्रशंसा शामिल थी।
उसी समय भारत ने अपना जवाब देने का अधिकार इस्तेमाल किया। भारत की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने इस्लामाबाद पर झूठ और धोखा फैलाने का आरोप लगाया और पाकिस्तान को कठपुतली शासन बताया।
नई दिल्ली ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उन्होंने मई 2025 में शत्रुता समाप्त करने में मध्यस्थता की थी। भारत का कहना है कि लड़ाई भारत और पाकिस्तान के बीच सीधे सैन्य संवाद के बाद रुकी थी।
अमेरिका-चीन नजदीकी और भारत की चिंता
भारत के लिए एक पोस्ट से ज्यादा चिंता का विषय पैटर्न है। शी चिनफिंग की वाशिंगटन यात्रा से साफ हुआ कि अमेरिकी विदेश नीति का रणनीतिक संतुलन बदल रहा है।
पहले अमेरिका एशिया नीति में भारत को चीन के मुकाबले के रूप में देखता था और क्वाड जैसे मंचों पर जोर देता था। अब ट्रंप प्रशासन बीजिंग को एक समान स्तर का साझेदार मानकर उससे सहयोग बढ़ाने को तैयार दिख रहा है।
रूसी तेल और प्रतिबंधों का खतरा
ट्रंप ने 18 सितंबर को लिंडसे ग्राहम के रूस को मंजूरी दी थी, जिसमें रूसी कच्चा तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है। भारत और चीन दोनों इसमें शामिल हैं, लेकिन ट्रंप का रवैया दोनों के प्रति अलग है। चीन को आर्थिक समझौते का प्रस्ताव दिया जा रहा है, जबकि भारत पर सजा का खतरा मंडरा रहा है।
