वाशिंगटन, प्रेट्र। सत्ता से बाहर जाने को अब बस एक सप्ताह बचा है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन द्वारा घोषित नए नियमेां से अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वालों या ग्रीन कार्ड पर रह रहे लोगों को फायदा होगा। उच्च कुशलताओं वाले भारतीय पेशेवरों को हर साल 85,000 H-1B वीजाओं का दो तिहाई जारी किया जाता है। USCIS डाटा के अनुसार, सितंबर 2019 तक 580,000 से अधिक  H-1B वीजा धारक थे।

अंतिम नियमों का एलान करते हुए अमेरिका के श्रम विभाग ने मंगलवार को कहा यह बदलाव अमेरिकी वर्करों के वेतन और नौकरी के मौकों को बचाने के लिए किया गया है। साथ ही विभाग ने यह भी कहा कि इससे विदेशी वर्करों के लिए प्रोग्राम व स्थायी एंप्लायमेंट सर्टिफिकेशन H-1B, H-1B1 और  E-3 Visa के दुरुपयोग पर भी रोक लग जाएगी। H-1B1 चीली और सिंगापुर के नागरिकों के लिए H-1B प्रोग्राम का वैरिएशन है।  E-3 वीजा ऑस्ट्रेलिया के वर्करों के लिए है। 

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही चुनाव से पहले मंगलवार की रात एच-1बी वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें भत्तों से जुड़े मानकों को बढ़ा दिया गया।  कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की शर्तों में बदलाव किए गए। व्हाइट हाउस ने फ्रॉड डिटेक्शन फोर्स को ज्यादा अधिकार दिया। 

वहीं 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद का औपचारिक शपथ लेने वाले जो बाइडन आव्रजन सुधारों को लेकर एक व्यापक योजना ला सकते हैं। उनके चुनाव वादों के अनुसार ऐसी आव्रजन व्यवस्था चाहिए जिसमें उच्च कुशलताओ के पेशेवरों को प्राथमिकता मिले, लेकिन इससे अमेरिकी इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को नुकसान न हो।

गैर-प्रवासी वीजा H1B वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं जिसके बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की अधिकतर IT कंपनी हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के तहत करती हैं। 

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