न्यूयॉर्क, एएनआइ। अपनी जान बचाकर अमेरिका भागकर आने वाली पाकिस्तान की महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल ने अपने मुल्क का दोहरा चेहरा बेनकाब किया है। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर सेना की ओर से ढाए जा रहे जुल्मों की पोल खोली है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में आतंकवाद के सफाए के नाम पर हजारों अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतार दिया गया। इस्माइल ने मानवाधिकार उल्लंघन के मोर्चे पर अपने मुल्क के दोहरे चरित्र को ऐसे समय बेनकाब किया, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन का रोना रो रहे हैं।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर शुक्रवार को इमरान खान के खिलाफ किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान इस्माइल ने कहा, 'पाकिस्तान में आतंकवाद को खत्म करने के नाम पर कई निर्दोष पश्तून लोगों की हत्या कर दी गई।

हजारों लोगों को पाकिस्तान सेना की यातना जेलों में डाल दिया गया है। हमारी मांग है कि पाकिस्तान की सेना तुरंत मानवाधिकारों का हनन करना बंद कर दे और बंदियों को रिहा करे।' इस विरोध प्रदर्शन में कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल हुए थे।

इस्माइल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया था कि वह करीब छह माह तक पाकिस्तान में छुपकर रही थीं। वह अपने कुछ दोस्तों की मदद से श्रीलंका के रास्ते पिछले माह अमेरिका पहुंचीं। इस्माइल (32) न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में अपनी बहन के घर ठहरी हुई हैं। उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक शरण के लिए आवेदन भी किया है। वह पाकिस्तान के दमन का शिकार हुए कई अल्पसंख्यक समुदायों के लिए उम्मीद का नया चेहरा बनकर उभरी हैं।

महिलाओं और लड़कियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ मुंह खोलने के कारण पाकिस्तान में गुलालाई इस्माइल के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज किया गया था। उन्होंने सुरक्षा बलों के हाथों दुष्कर्म और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं को सोशल मीडिया पर उठाया था।

Posted By: Nitin Arora

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