नई दिल्ली। चीन से निकले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में कहर बरपाया हुआ है। उसके बाद भी कुछ देश ऐसे हैं जहां तक कोरोना वायरस नहीं पहुंच पाया। ऐसा नहीं है कि इन देशों के बारे में बहुत अधिक लोग जानते हैं। ये ऐसे देश हैं जो दुनिया से कटे हुए हैं। इसी वजह से इन देशों में अब तक कोरोना वायरस का एक भी मरीज नहीं मिला है। फिलहाल ऐसे देशों की संख्या 11 बताई जा रही है। इन 11 देशों में कोरोना वायरस का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। 

दुनिया के अधिकतर देश कोरोनावायरस की मार से परेशान है। कोरोना की वजह से दुनिया के कई देशों की आर्थिक स्थिति ही पूरी तरह से बिगड़ गई है। अब वो जोड़ घटाना करने में लगे हुए हैं। सबसे शक्तिशाली और साधन संपन्न देश अमेरिका के तो हालात सबसे अधिक खराब है। डीडब्ल्यूए की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में कोरोना से सबसे अधिक संक्रमित मरीज भी है और यहां मरने वालों की संख्या भी सबसे अधिक है। उसके बाद कुछ और संपन्न और विकासशील देशों के नाम है। जिन देशों ने कोरोना वायरस की गंभीरता को नहीं समझा उनको इसका अधिक खामियाजा भुगतना पड़ा है। 

दुनिया भर में एक साथ कई शोध किए जा रहे हैं, जिनमें कोरोना वायरस के वैक्सीन पर काम किया जा रहा है।इसी क्रम में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक अच्छी खबर दी है। इस रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर से इस वैक्सीन के आशाजनक परिणाम आने लगेंगे। इस वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग भी हो रही है। 

टीम को लीड कर रही वैक्सीनोलॉजी की प्रोफेसर सारा गिलबर्ट ने बताया कि हमने 18 से 55 वर्ष की उम्र के 500 वालंटियरों पर शुरुआती और मध्य चरण के नियंत्रित परीक्षण किए हैं, जिनके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। जबकि अंतिम चरण में हम इसकी संख्या और उम्र में भी विस्तार करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि हमारी कोशिश है कि सितंबर तक कम से कम कुछ वैक्सीन तैयार हो जाएं। हालांकि, एक साथ सभी जगहों पर वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगा, लेकिन अगर अभी वैक्सिंग की मैन्युफैक्चरिंग अधिक मात्रा में करते हैं तो आने वाले समय में यह सभी के लिए उपलब्ध हो जाएगा। 

उधर इजरायल में सेल थैरेपी के जरिए कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित 6 मरीजों का सफल इलाज किया गया है। अब इस थैरेपी का उपयोग अमेरिकी मरीजों पर किया जाएगा। इस वहीं, 1 लाख 65 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस बीच, कोरोना वायरस के वैक्सीन को ढूंढने में वैज्ञानिक और चिकित्सक एक साथ जुटे हुए हैं। इसके लिए कई ट्रायल हो चुके हैं और कई ट्रायल चल रहे हैं। 

ये हैं वो 11 देश 

किरीबाती

मध्य प्रशांत महासागर में बसा यह देश बाकी दुनिया से सिर्फ एयर रूट और समंदर के जरिए जुड़ा है। देश की आबादी सवा लाख से जरा ज्यादा है।

मार्शल आइलैंड्स

मध्य प्रशांत महासागर का यह देश भी द्वीपों का समूह है। देश की आबादी करीब 60,000 है।

माइक्रोनेशिया

600 द्वीप समूहों वाला यह देश मुख्य रूप से चार द्वीपों पर बसता है। पश्चिमी प्रशांत महासागर के इस देश की जनसंख्या 1,12,000 से थोड़ा ज्यादा है।

नाऊरू

ऑस्ट्रेलिया के पूर्वोत्तर में बसा नाऊरू भी द्वीपीय देश है। हवाई यातायात बंद होते ही यह देश दुनिया से कट गया। इसकी करीब 13,000 की आबादी कोरोना की चपेट में आने से बच गई।

पलाऊ

करीब 18,000 आबादी वाले पश्चिमी प्रशांत महासागर के इस देश में भी कोरोना का कोई मामला नहीं है।

समोआ

प्रशांत महासागर का यह द्वीपीय देश बाकी दुनिया से दूर रहने के कारण कोरोना से बच गया, समोआ की आबादी करीब दो लाख है।

सोलोमन आइलैंड्स

दक्षिणी प्रशांत महासागर में 600 से ज्यादा द्वीपों से मिलकर बना सोलोमन आइलैंड भी कोविड-19 महामारी से बचा हुआ है। देश की आबादी 6.52 लाख से ज्यादा है।

टोंगा

दक्षिणी प्रशांत महासागर में 170 द्वीपों से मिलकर बना यह देश भी कोरोना के प्रकोप से सलामत है। 1.3 लाख आबादी वाले टोंगा के कई द्वीप इंसान के रहने लायक नहीं हैं।

तुर्कमेनिस्तान

60 लाख की आबादी वाला तुर्कमेनिस्तान अकेला ऐसा देश है जो तीन तरफ से जमीन से घिरा हुआ है। ईरान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसियों के बावजूद तुर्कमेनिस्तान का दावा है कि उसके यहां कोरोना का एक भी मामला नहीं आया है।

तुवालू

साढ़े 11 हजार जनसंख्या वाले प्रशांत महासागर के तुवालू में भी कोई केस सामने नहीं आया है।

वनुआतु

दक्षिणी प्रशांत महासागर में 2.92 लाख की आबादी वाला यह देश भी कोरोना मुक्त है।  

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