वाशिंगटन, एजेंसी। चीन के उइगर मुसलमानों पर उत्‍पीड़न मामले पर अमेरिका ने सख्‍त रूख अपनाया है। उइगर मुसलमानों पर उत्‍पीड़न को लेकर प्रतिनिधि सभा ने बिल को भारी बहुमत से पास कर दिया है। हालांकि, यह बिल अब राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के हस्‍ताक्षर के इंतजार में है। उधर, अब इस मामले में पाकस्तिान की मुश्किलें भी बढ़ गई है। पाकिस्‍तान जिस तरह से कश्‍मीर में मानवाधिकार के सवाल पर भारत को घेरता रहा है, अब उसे उइगर मुसलमानों पर भी अपना रुख को साफ करना होगा।

राष्‍ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप अख्तियार कर लेगा बिल 

उइगर मुसलमानों पर उत्‍पीड़न के विरोध में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पारित बिल व्हाइट हाउस पहुंच गया है। बिल उइगर मानवाधिकार अधिनियम पर राष्‍ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप अख्तियार कर लेगा। राष्‍ट्रपति इस बिल पर वीटो लगा सकते हैं या इस पर हस्‍ताक्षर कर सकते है। अमेरिकी राष्‍ट्रपति को यह विवेकाधिकार शक्ति है कि वह उस कानून को रोक दे या उस पर हस्‍ताक्षर करें। बता दें कि बुधवार को प्रतिनिधि सभा ने इस बिल को 413-1 वोट से पारित किया था। यह बिल चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगरों और अन्य मुस्लिम समूहों के दमन के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रतिबंधों का आह्वान करता है, जहां संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि शिविरों में दस लाख से अधिक मुसलमानों को हिरासत में लिया गया है।

हांगकांग पर चीन के विवादित कानून के बाद सख्‍त हुआ अमेरिका 

बता दें कि हांगकांग पर चीन द्वारा नए विवादित सुरक्षा कानून को मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका ने बीजिंग के खिलाफ तेवर सख्‍त कर दिए हैं। चीन द्वारा हांगकांग पर बना नया कानून सितंबर से लागू हो जाएगा। नए कानून के अनुसार, चीनी सुरक्षा एजेंसियां हांगकांग में अपनी सस्थाएं संचालित कर सकतीी हैं।  इस कानून के तहत हांगकांग से अर्धस्वायत का दर्जा खत्म हो गया और अब यह पूर्ण रूप से चीन के नियंत्रण में आ गया। चीन की संसद ने गुरुवार को हांगकांग के लिए नए विवादित सुरक्षा कानून को मंजूरी दी। 

उइगर मुसलमानों पर फंसे इमरान खान 

इस बिल के बाद पाकिस्‍तान की मुश्किलें भी बढ़ गई है। कश्‍मीर मुद्दे पर पूरी दुनिया में मानवाधिकार के हनन का आरोप लगाने वाले पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को अब उइगर मुसलमानों पर अपनी नीति को साफ करने का दबाव होगा। अब उनकी दोहरी नीति की कलई खुलेगी। हाल में बीबीसी रेडियो को दिए अपने एक साक्षात्‍कार में इमरान उइगुर मुस्लिम के मुद्दे को बहुत साफगाई से टाल गए थे। उस वक्‍त उनसे सवाल पूछा गया था कि वह उइगर मुसलमानों बहुत मुखर क्यों नहीं है, लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर वह हर मंच पर भारत को घेरते हैं। खान ने अपने उत्‍तर में कहा था, इसके मुख्य रूप से दो कारण है। सबसे पहले, भारत में जो हो रहा है उसकी तुलना चीन से नहीं की जा सकती। दूसरा, चीन एक महान मित्र रहा है। इसने हमारी सरकार को विरासत में मिले आर्थिक संकट के कारण हमारे सबसे कठिन समय में हमारी मदद की है। इसलिए, हम चीन के साथ निजी तौर पर नहीं बल्कि चीजों के बारे में बात करते हैं। सार्वजनिक रूप से ये संवेदनशील मुद्दे हैं।   

Posted By: Ramesh Mishra

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