न्यूयार्क, आइएएनएस। शुक्रवार को मुंबई में हुए आतंकी हमले के 13 साल पूरे हो जाएंगे लेकिन मामले से जुड़े पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का इंतजार पूरा नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त मामले से जुड़े चार अन्य लोगों के भी पकड़ में आने का अमेरिका और भारत में इंतजार हो रहा है। इन लोगों पर अमेरिकी कोर्ट में आरोप तय हो चुके हैं।

राणा के बचपन के दोस्त पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक दाउद सैयद गिलानी उर्फ डेविड कोलमन हेडली को अमेरिकी कोर्ट 35 साल के कारावास की सजा सुना चुकी है। सजा का यह एलान मुंबई आतंकी हमले में हेडली के सहयोग करने का दोष साबित होने के बाद हुआ। इस हमले में छह अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। हेडली अपने लिए निर्धारित उम्रकैद की सजा से बचने के लिए वादामाफ गवाह बन गया था। उसने भारत में चल रहे मामलों के लिए भी वादामाफ गवाह बनने की इच्छा जताई थी। 2015 में मुंबई के सत्र न्यायालय ने उसे गवाह के रूप में पेश किए जाने की अनुमति दे दी थी। हेडली ने राणा की मदद से भारत आने के लिए बिजनेस वीजा हासिल किया था। इसके बाद उसने मुंबई आकर आतंकी हमले के लिए मौके-हालात देखे और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को रिपोर्ट दी। इसी के बाद 2008 में आतंकी हमला हुआ जिसमें देश-विदेश के 170 से ज्यादा लोग मारे गए।

मुंबई हमले के सिलसिले में शिकागो की अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी साजिद मीर को भी आरोपित किया है। एफबीआइ ने साजिद को अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में रखकर उस पर 50 लाख डालर (करीब 37 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया है। साजिद के अतिरिक्त कोर्ट ने तीन अन्य को भी मुंबई हमले के लिए आरोपी बनाया है। इनके नाम मेजर इकबाल, अबू काफा और मजहर इकबाल उर्फ अबू अल-कामा हैं। साजिद मीर समेत सभी चार आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं और फिलहाल अमेरिका की पकड़ से बाहर हैं। शिकागो की कोर्ट ने मुंबई हमले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के आरोप से तहव्वुर राणा को बरी कर दिया है। कोर्ट ने डेनमार्क के एक अखबार पर हुए आतंकी हमले की साजिश रचने का दोषी पाते हुए राणा को 2013 में 14 साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस समय वह कोविड-19 महामारी के चलते मिली राहत का लाभ लेते हुए जेल से बाहर है।