नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले से पूरी दुनिया थर्रा उठी थी। विश्व की महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका के दिल पर आतंकियों ने सीधे चोट की थी। इस भयावह आतंकी हमले की वजह से कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी तो अमेरिका को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस त्रासदी की विभीषिका का लोग लंबे समय से सामना कर रहे हैं तो इस हमले में जान की बाजी लगाने वाले फायरफायटर्स गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।

इस हमले से जुड़ी बीमारियों की वजह से अब तक 250 फायरफायटर्स की जान जा चुकी है। फायर कमिश्नर डेनियल नाइग्रो ने हाल में एक स्टेटमेंट में कहा है कि 11 सितंबर, 2001 को ही हमने 343 फायरफायटर्स को खोया था। वहीं इससे जुड़ी बीमारियों की वजह से 250 सदस्य हमारा साथ छोड़ चुके हैं। 2002 से 2010 तक हादसे से जुड़ी बीमारी की वजह से 52 फायरफायटर तो 2011 से 2015 के दौरान 78 फायरफायटर ने अपनी जान गंवाई थी।

आतंकी संगठन अलकायदा ने चार अमेरिकी विमानों का अपहरण कर दो विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर से टकराए, तीसरा विमान वॉशिंगटन डीसी के बाहर पेंटागन और चौथा विमान पेंसिलवेनिया के खेतों में गिराया।

हजारों ने गंवाई जान

9/11 हादसे में तीन हजार से अधिक लोगों ने जान गंवाई। इनमें करीब चार सौ पुलिसकर्मी और अग्निशमन दस्ते के सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। हमले में मारे गए 372 दुनिया के अलग- अलग देशों के लोग थे, जिनमें विमान अपहर्ताओं के अलावा 77 देशों के नागरिक भी शामिल थे। इन हमलों में लगभग 3,000 आम लोग तथा 19 अपहरणकर्ता मारे गए। न्यूयॉर्क राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जून, 2009 तक अग्निशामकों एवं पुलिस कर्मियों सहित, 836 आपातसेवक मारे जा चुके हैं। वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर हुए हमले में मारे गए 2,752 पीड़ितों में से न्यूयॉर्क शहर तथा पोर्ट अथॉरिटी के 343 अग्निशामक और 60 पुलिस अधिकारी थे। पेंटागन पर हुए हमले में 184 लोग मारे गए थे। हताहतों में 70 देशों के नागरिकों सहित नागरिकों की भारी संख्या थी। 

Edited By: Vineet Sharan