वाशिंगटन, एएनआइ। लंबे समय से यह धारणा रही है कि मानव में मस्तिष्क का पैर्टन अद्वितीय है। जिसे अब वैज्ञानिकों ने चुनौती दी है। शोधकर्ताओं की टीम ने गोरिल्ला, ऑरंगुटान्स में भी समान पैटर्न पाया है। धारणा यह है कि हमारे मस्तिष्क में बाएं और दाएं ओर कुछ संज्ञानात्मक क्षमताओं के लिए विशेषताएं हैं। उदाहरण के लिए मनुष्यों में भाषा का मुख्य रूप से बाएं हिस्से से संबंध होता है। इसके साथ ही दाहिने हाथ को भी मस्तिष्क के बाएं हिस्से में मोटर कार्टेक्स द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस तरह के कार्य से मस्तिष्क की विषमता का पता चलता है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि हालांकि, प्राइमेट्स (स्तनपायी प्राणियों में सर्वोच्च श्र्रेणी के जैसे- मनुष्य, बंदर, चिंपाजी आदि) के बीच तुलनात्मक अध्ययन दुर्लभ है। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर इवोल्यूशनरी एंथ्रोपोलाजी और वियना यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मनुष्यों और वानरों की खोपड़ी के आकार और पैटर्न का अध्ययन किया। अध्ययन के प्रमुख लेखक साइमन न्यूबॉयर ने कहा कि मनुष्यों और तमाम वानरों में मस्तिष्क की विषमता और पैटर्न एक सा था।

अध्ययन करने के बाद शोधकर्ताओं ने बताया कि केवल मनुष्य ही नहीं चिंपाजी, गोरिल्ला और ऑरंगुटन्स में भी वही मस्तिष्क पैटर्न है जो मनुष्यों में होता है। इस अध्ययन के सह लेखक फिलिप मिटेरोएकर ने कहा कि लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि वानरों के समान मस्तिष्क पैटर्न होने के बावजूद मनुष्यों में कुछ विशेष व्यक्तिगत बदलवा हुए थे। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह दिखाता है कि मनुष्य के मस्तिष्क में कार्यात्मक और विकासात्मक संशोधनों को बढ़ावा मिला है। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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