नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। कोरोनावायरस की गंभीरता को जानने के बाद से दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका टीका खोजने में लगे हुए हैं मगर अभी तक किसी को भी कामयाबी नहीं मिल पाई है। जिन देशों को इस दिशा में थोड़ी बहुत कामयाबी मिली भी है उनका क्लीनिकल ट्रायल अब तक पूरा नहीं हो पाया है, वो उसके लिए काम कर रहे हैं। इस बीच वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस (कोविड-19) की कमजोरी खोजने में बड़ी सफलता मिली है। इससे ना सिर्फ इस खतरनाक वायरस को खत्म किया जा सकता है बल्कि नई वैक्सीन बनाने में मदद भी मिल सकती है।

दरअसल उन्होंने कोरोना के जीनोम में संभावित लक्ष्यों की पहचान की है, जिन्हें साधा जा सकता है। अभी तक इन कमजोर बिंदुओं की पहचान नहीं हो पाई थी। न्यूजीलैंड की ओटागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, कोरोना वायरस का कारण बनने वाले सार्स-कोवी-2 के जीनोम में कमजोर बिंदुओं के उपयोग से इस घातक वायरस को खत्म किया जा सकता है। 

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलीक्यूलर साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि वायरल जीनोम में इन लक्ष्यों की पहचान इसके एमआइ आरएनए के जरिये की गई है। इसका यह आरएनए न्यूक्लिक एसिड आधारित इम्यून सिस्टम होता है, जो शरीर की कोशिकाओं के अंदर काम करता है। वैज्ञानिकों ने कहा कि एमआइ आरएनए कोशिकाओं के अंदर जीन की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक है और वायरसों को खत्म करने में भी इसकी अहम भूमिका होती है।

इस अध्ययन से जुड़े ओटागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता एलेक्स मैकलेलान ने कहा, 'हमारा अध्ययन महज  यही कहता है कि इन लक्ष्यों पर नजर रखने की जरूरत है और यह देखना है कि इन्हें लेकर आने वाले समय में क्या होता है।' शोधकर्ताओं का मानना है कि ये लक्ष्य वायरस को कमजोर करने में उपयोगी हो सकते हैं। इससे इस खतरनाक वायरस के खिलाफ नए उपचारों और वैक्सीन के विकास में मदद मिल सकती है।

कोरोना वायरस जब शुरू हुआ तो उसके बारे में काफी कम जानकारी उपलब्ध थी। शोधकर्ता और मेडिकल कर्मी तेजीसे बढ़ते इस वायरस से हैरान थे। कुछ समय बाद ही कोरोना वायरस यानि कोविड-19 के बिना लक्षण वाले मरीज भी पॉजिटिव मिलने लगे। इस नई जानकारी से कई चीजें साफ हुईं, खासकर ये जानने में आसानी हुई कि मामले तेजी से कैसे बढ़ रहे हैं। 

हालांकि अब भी ये साफ नहीं हुआ है कि बिना लक्षण वाले संक्रमण फैलाते हैं या नहीं। कोरोना वायरस के टेस्ट में जो लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनमें से ज़्यादातर लोग बिना लक्षण वाले होते हैं यानि उनमें बीमारी का कोई लक्षण नजर नहीं आता। कोरोनावायरस के बिना लक्षण वाले लोग अपने आपको काफी किस्मतवाला भी मानते हैं क्योंकि उन्हें इस जानलेवा संक्रमण के आक्रामक इलाज से नहीं गुजरना पड़ता। साथ ही उन्हें लगता है कि वायरस उनके शरीर को ज्यादा क्षति भी नहीं पहुंचा पाया।

एक नई रिसर्च कुछ और ही कहती है। कोरोना के एक मामले के बारे में बात करते हुए एक डॉक्टर ने बताया कि कैसे कोविड-19 से हए निमोनिया से एक मरीज की मौत हो गई, जबकि मेडिकल टीम ने उनका इलाज एहतियात के साथ किया था। वहीं, दूसरी तरफ कोरोना की एक मरीज को आईसीयू में वेंटीलेटर के लिए भेजा गया था, वो दिखने में बिल्कुल ठीक लग रही थी, लेकिन जब उसकी ब्लड ऑक्सीजन लेवल पर नजर डाली तो वह बेहद कम था। डॉक्टर ये देख हैरान थे कि ये लड़की होश में कैसे है। 

चीन के वुहान में हुई रिसर्च के मुताबिक, कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीज के सीटी स्कैन में फेफड़ों में संक्रमण नजर आया। जबकि कोरोना के गंभीर मामलों में भी फेफड़ों में ऐसा संक्रमण नहीं दिखता। कोरोना के बिना लक्षण वाले मामले कम नहीं हैं लेकिन परेशानी की बात ये है कि बिना लक्षण वाले बीमारी भी फेफड़ों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है। साथ ही मरीज में निमोनिया या सांस की परेशानी से जुड़ा कोई लक्षण नजर नहीं आता।

लक्षणों का न दिखना न सिर्फ इसलिए जोखिम भरा है कि अनजाने में न जाने कितने लोग इससे संक्रमित होते हैं, बल्कि इसलिए भी कि ऐसे मामलों में अंगों को हो रहे नुकसान का इलाज नहीं हो पाता क्योंकि इसका पता ही नहीं चलता। कोरोनावायरस के बिना लक्षण वाले मामलों में अचानक मृत्यु या अंगों को क्षति पहुंचने का जोखिम काफी बड़ा है।

Posted By: Vinay Tiwari

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