वाशिंगटन [एजेंसी]। पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश प्रिंस सलमान ने ही दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए भी अब तक के जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती नजर आ रही हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान उजागर न होने की शर्त पर ये जानकारी उजागर की है।  हालांकि, सऊदी सरकार शुरुआत से इस दावे को नकार रही हैं। 

बता दें कि पत्रकार जमाल खशोगी की बीते महीने सऊदी दूतावास में हत्या हो गई थी। खशोगी दूतावास में प्रवेश अपने विवाह से पहले कुछ क़ाग़ज़ात लेने आए थे। सबसे पहले तुर्की ने तुर्की दावा किया था कि खशोगी की वाणिज्य दूतावास में ही हत्या हो गई है।  

एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि यह निष्कर्ष तुर्की सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई रिकॉर्डिग और अन्य साक्ष्यों पर आधारित है। अधिकारी का कहना है कि जांचकर्ताओं का यह भी मानना है कि खशोगी की हत्या जैसा ऑपरेशन बिना क्राउन प्रिंस की मंजूरी और संज्ञान के खत्म हो ही नहीं सकता। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सऊदी अरब के दूतावास की प्रवक्ता ने कहा कि ये आरोप और दावे झूठे हैं। हम लगातार इस संदर्भ में अलग-अलग थ्योरी सुन रहे हैं। सीआईए ने हालांकि अभी इस बारे में किसी तरह का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।


वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, सीआइए का आकलन है कि प्रिंस के भाई खालिद बिन सलमान ने जमाल खशोगी को फोन कर इंस्‍ताबुल के वाणिज्यिक दूतावास जाकर दस्तावेज लेने के लिए प्रोत्साहित किया था। सूत्रों ने बताया कि खालिद ने अपने भाई (क्राउन प्रिंस) के आदेश पर यह फोन पत्रकार को किया था। हालांकि, खालिद ने ट्वीट कर इससे इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी खशोगी को फोन नहीं किया।

सीआइए ने तुर्की द्वारा उपलब्ध कराई गई ऑडियो रिकॉर्डिग की भी जांच की। यह रिकॉर्डिग दूतावास के भीतर की है। इसके साथ ही खशोगी की हत्या के बाद दूतावास के भीतर से किए गए एक फोन कॉल की भी रिकॉर्डिग की जांच की गई।

प्रिंस सलमान की निंदा के लिए मिलती थीं धमकियां
सऊदी अरब के मौजूदा क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की निंदा करने वाले जमाल खशोगी को अक्‍सर धमकियां मिलती थी। इन धमकियों के कारण पिछले साल उन्‍होंने सऊदी अरब छोड़ दिया था। सऊदी अरब के अधिकारी उन्हें क्राउन प्रिंस की नीतियों की निंदा करने के चलते धमका रहे थे।

आइये जानते हैं जमाल खशोगी के गायब होने और इसके बाद क्‍या हुआ

दो अक्टूबर
बीते दो अक्टूबर को अमेरिका में रहने वाले वाशिंगटन पोस्ट के सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी दिन में करीब एक बजे तुर्की के शहर इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्यक दूतावास के अंदर गए। उनके करीबियों के मुताबिक वे तुर्की में रहने वाली अपनी मंगेतर हैटिस केंगिज से शादी करना चाहते थे और इसी से जुड़े कुछ कागजात लेने वे सऊदी दूतावास गए थे। हैतिस के मुताबिक जमाल ने इसके लिए पहले से आवेदन किया था और एक अधिकारी द्वारा बुलाए जाने के बाद वे दूतावास गए थे।

हैटिस के मुताबिक वे जमाल खशोगी का कई घंटे तक दूतावास के बाहर इंतजार करती रहीं लेकिन वे बाहर नहीं आए। जमाल के दोनों मोबाइल भी हैटिस के पास ही थे इस वजह से वे उनसे संपर्क भी नहीं कर पा रहीं थीं। कई घंटे इंतजार करने के बाद हैतिस ने तुर्की पुलिस को फोन किया। पुलिस के मुताबिक उसने दूतावास के बाहर लगे कैमरे की फुटेज शाम को साढ़े पांच बजे देखी, जिससे साफ़ हो गया कि खशोगी दूतावास से बाहर नहीं निकले हैं।

तीन अक्टूबर
मामला बढ़ने के बाद अगले दिन सुबह सऊदी अरब सरकार ने जमाल खशोगी के लापता होने के बारे में एक बयान जारी किया। इस बयान में यह भी कहा गया कि खशोगी कागजात लेने के बाद सऊदी के दूतावास से निकल गए थे और इसके बाद ही वे लापता हुए हैं।

सऊदी अरब सरकार के इस बयान का जमाल की मंगेतर हैटिस केंगिज और तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन ने खंडन किया। एर्दोआन के प्रवक्ता का कहना था कि जमाल खशोगी अभी भी सऊदी दूतावास के अंदर ही हैं। हम दूतावास के अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा।

चार अक्टूबर
चार अक्टूबर को तुर्की सरकार ने राजधानी अंकारा में सऊदी राजदूत को इस मामले पर बात करने के लिए तलब किया। इसी दिन वाशिंगटन पोस्ट की ओर से भी जमाल खशोगी के गायब होने पर चिंता व्यक्त की गई। वाशिंगटन पोस्ट के संपादकीय विभाग के प्रमुख फ्रेड हिएट ने एक बयान जारी कर कहा कि जमाल के गायब होने के बाद हमने इस मामले में अमेरिका, तुर्की और सऊदी तीनों देशों के अधिकारियों से बात की है लेकिन पत्रकार का कुछ पता नहीं लगा है।

पांच अक्टूबर
यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व के अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपने के बाद सऊदी सरकार पर भारी दबाव बना। इसके बाद उसने तुर्की के अधिकारियों को अपने दूतावास में तलाशी लेने की अनुमति दे दी। एक अखबार को दिए साक्षात्कार में क्राउन प्रिंस बिन सलमान का कहना था कि हालांकि, दूतावास हमारा संप्रभु क्षेत्र है. फिर भी हम तुर्की के अधिकारियों को वहां घुसने और तलाशी लेने की इजाजत दे रहे हैं क्योंकि हमारे पास कुछ भी छिपाने को नहीं है।

छह अक्टूबर
तुर्की के पुलिस अधिकारियों ने छह अक्टूबर को सऊदी दूतावास में छानबीन की। इसके बाद इसी दिन शाम को पुलिस ने एक सनसनीखेज बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि हमारे पुलिस अधिकारियों का शुरुआती जांच के आधार पर यह मानना है कि पत्रकार खशोगी की दो अक्टूबर को ही सऊदी दूतावास में हत्‍या कर दी गई। एक सरकारी अधिकारी ने अमेरिकी मीडिया को बताया कि हम पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि खशोगी की हत्या पूर्वनियोजित थी। दूतावास में मारने के बाद जमाल के शव को कहीं और ठिकाने लगा दिया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इस बात को मनगढ़ंत बताया।


14 अक्टूबर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में पहली प्रतिक्रिया दी। अमेरिकी न्यूज़ चैनल सीबीएस न्यूज़ से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि हमने सऊदी के प्रमुख सलमान से इस पर बात की है और उन्होंने आरोपों से इन्‍कार किया है। उनका कहना था कि अब इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और अगर इसमें सऊदी के अधिकारियों का दोष पाया जाता है तो यह मुझे बेहद नाराज करने वाला होगा। ट्रंप के मुताबिक खशोगी की हत्या में सऊदी अरब का हाथ होने पर उसे इसके गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

15 अक्टूबर
अमेरिका की प्रतिक्रिया आने के बाद सऊदी के क्राउन प्रिंस बिन सलमान ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन से फोन पर बात की। इसके बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय की ओर से घोषणा की गई कि सऊदी के वाणिज्यक दूतावास का गहराई से निरीक्षण किया जाएगा और इस जांच में तुर्की और सऊदी अरब दोनों ही देशों के अधिकारी शामिल होंगे।


16 अक्टूबर
इस बारे में तुर्की के राष्ट्रपति ने देश की संसद में एक बयान दिया। इसमें उनका कहना था कि इस मामले में कई चीजों पर गौर किया जा रहा है। सऊदी वाणिज्यक दूतावास की दीवारों और फर्श पर कोई जहरीला पदार्थ भी था, जिसके ऊपर पेंट किया गया है। हमारे जांचकर्ता इस जहरीले पदार्थ का पता लगा रहे हैं। हमें आशा है कि हम जल्द किसी नतीजे पर पहुंच जाएंगे।

तुर्की के सूत्रों ने कहा कि अधिकारियों को ऑडियो रिकार्डिग मिली है जिससे यह संकेत मिलता है कि खशोगी की दूतावास में ही हत्या कर दी गई। एर्दोआन के इस बयान के बाद तुर्की के अधिकारियों ने सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास के प्रमुख मोहम्मद अल-ओताबी के घर की तलाशी लेने का निर्णय किया। इसके कुछ घंटे बाद ही खबर आई कि ओताबी तुर्की छोड़कर चले गए हैं।

17 अक्‍टूबर
फॉक्स बिजनेस नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि वह जमाल खशोगी मामले में पोंपियो की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकार के लापता होने के मामले को लेकर पोंपियो को सऊदी और तुर्की के दौरे पर भेजा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने तुर्की से कहा है कि अगर उनके पास कोई ऑडियो या वीडियो साक्ष्य है तो उसे मुहैया कराया जाए।

19 अक्‍टूबर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि सऊदी के लापता जमाल खशोगी की मौत हो चुकी है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि इसमें अगर सऊदी अरब का हाथ पाया जाता है तो इसके बेहद गंभीर परिणाम होंगे। ट्रंप का यह बयान सऊदी और तुर्की के दौरे से लौटे विदेश मंत्री माइक पोंपियो द्वारा जांच की जानकारी मुहैया कराए जाने के बाद आया है।

20 अक्‍टूबर
सऊदी अरब ने स्वीकार कर लिया कि जमाल खशोगी की इस्तांबुल स्थित वाणिज्य दूतावास में हुए संघर्ष के दौरान मौत हो चुकी है। 'वाशिंगटन पोस्ट' के स्तंभकार खशोगी दो अक्टूबर को सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में गए थे, लेकिन उन्हें बाहर आते किसी ने नहीं देखा। सऊदी अरब उनकी गुमशुदगी में अपना हाथ होने से लगातार इन्कार कर रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के बयान पर भरोसा जताते हुए इसे पहला अच्छा और बड़ा कदम करार दिया है। सऊदी अरब के लोक अभियोजक ने बताया कि वाणिज्य दूतावास में खशोगी जिन लोगों से मिलने गए थे, उनसे उनकी लड़ाई हो गई थी जिसमें वह मारे गए। इस सिलसिले में 18 सऊदी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है।

22 अक्‍टूबर
जमाल खशोगी के शव के टुकड़े इस्तांबुल स्थित सऊदी राजदूत के घर के बगीचे से बरामद हुए हैं। राजदूत का ये आवास सउदी काउंसलेट से कुछ ही दूर स्थित है। अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कि सऊदी अरब के हत्यारे एजेंटों ने भ्रम की स्थिति पैदा करने के लिए खशोगी के एक बॉडी डबल का भी इंतज़ाम किया था और उसे खशोगी के कपड़े पहना दिए गए थे।

26 अक्‍टूबर
सऊदी पत्रकार खशोगी की मंगेतर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का व्हाइट हाउस आने का न्योता अस्वीकर कर दिया है। उन्होंने ट्रंप पर जमाल हत्याकांड की जांच में ईमानदार नहीं होने का आरोप लगाया है। हैटिस केंगिज ने तुर्की टीवी को बताया कि उन्होंने सोचा था कि निमंत्रण का उद्देश्य अमेरिका में जनता की राय को प्रभावित करना था।

31 अक्‍टूबर
तुर्की के मुख्य अभियोजक ने पहली बार जमाल खशोगी की हत्‍या का ब्योरा सार्वजनिक किया है। मुख्य अभियोजक ने कहा कि पत्रकार ने जैसे ही इस्तांबुल में स्थित वाणिज्य दूतावास में कदम रखा वैसे ही गला दबाकर उनकी हत्या कर दी गई और उसके बाद उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। यह सब-कुछ पूर्व नियोजित तरीके से किया गया।

एक नवंबर
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने मारे गए पत्रकार जमाल खशोगी को खतरनाक इस्लामी बताया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुश्नेर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन के साथ फोन पर बातचीत में क्राउन प्रिंस ने यह कहा था। रियाद द्वारा सार्वजनिक रूप से खशोगी की हत्या की बात स्वीकार करने से पहले ही क्राउन प्रिंस ने फोन किया था।

चार नवंबर
तुर्की के एक अधिकारी ने दावा किया कि सऊदी ने इस्तांबुल में वाणिज्य दूतावास में जमाल खशोगी की हत्या के बाद सबूतों को छिपाने के के लिए दो विशेषज्ञों को भी भेजा था। यह काम तुर्की पुलिस को परिसर की तलाशी लेने की अनुमति देने से पहले उठाया गया था। अभी तक उनका शव तुर्की को नहीं मिला है। दावा है कि उनके शव को तेजाब में गला दिया गया। समाचारपत्र सबा में छपी रिपोर्ट के अनुसार सऊदी से हत्या की जांच के लिए पिछले महीने भेजी गई टीम में रसायन विशेषज्ञ अहमद अब्दुलअजीज अल-जानोबी और विष विज्ञान विशेषज्ञ खालेद याहया अल-जहरानी भी शामिल थे।

10 नवंबर
जमाल खशोगी के शव को हत्यारों ने तेजाब में गलाने के बाद नाले में बहा दिया था। तुर्की सरकार समर्थक दैनिक सबाह ने सूत्र का हवाला दिए बगैर लिखा है कि इस्तांबुल में सऊदी वाणिज्य दूतावास के नाले से लिए गए नमूने में तेजाब के अंश मिले हैं। इससे जांचकर्ताओं का मानना है कि पत्रकार के शव को तरल पदार्थ बनाने के बाद नाले से निपटाया गया।

14 नवंबर
सऊदी अरब के अभियोजक ने कहा था कि खशोगी की हत्या में दोषी पांच अधिकारियों को मौत की सजा हो सकती है, लेकिन इस हत्या में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की भागीदारी के सबूत नहीं हैं।

15 नवंबर
तुर्की के हुर्रियत अखबार के स्तंभकार अब्दुल कादिर सेल्वी ने दावा किया है कि जमाल खशोगी की हत्या के मामले में तुर्की के पास दो ऑडियो हैं। सात मिनट के पहले ऑडियो से साबित होता है कि खशोगी की गला घोंटकर हत्या की गई थी। जबकि, 15 मिनट के दूसरे ऑडियो से स्पष्ट होता है कि खशोगी की हत्या सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी।

17 नवंबर
जमाल खशोगी की हत्या का आदेश सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए भी अब तक के जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती नजर आ रही हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने पहचान उजागर न होने की शर्त पर ये जानकारी उजागर की है। हालांकि, सउदी सरकार शुरुआत से इस दावे को नकार रही हैं।

 

Posted By: Vikas Jangra

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