वाशिंगटन, प्रेट्र। अनंत रहस्यों से भरे ब्रह्मांड में शोधकर्ता लगातार नई खोजें कर रहे हैं। अब शोधकर्ताओं ने शनि गृह की परिक्रमा कर रहे 20 नए चंद्रमाओं की खोज की है, जिससे इस गृह के चंद्रमाओं के संख्या 82 हो गई है। हमारे सौरमंडल में अभी तक बृहस्पति के पास सबसे ज्यादा 79 चांद थे, लेकिन इस खोज के बाद शनि सबसे आगे निकल गया है। ताजा खोज के बाद हमारे ब्रह्मांड में विभिन्‍न ग्रहों के चंद्रमाओं की गिनती कुल 210 हो गई है।इनमें शनि के कुल 82, ब्रहस्‍पति के 79, यूरेनस के 27, नेप्‍चयून के 14, प्‍लूटो के 5, मंगल के दो और पृथ्‍वी का एक चांद शामिल है। 

कायम है ब्रहस्‍पति की बादशाहत 

हालांकि सबसे अधिक चांद के मामले में शनि ने भले ही ब्रहस्‍पति को पछाड़ दिया हो लेकिन सबसे बड़े चांद पर अब भी उसकी ही बादशाहत कायम है। उसका गेनीमेडे चांद धरती के करीब आधे आकार का है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज शनि की उत्पत्ति व विकास पर और प्रकाश डाल सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शनि के पास और सौ छोटे चांद हो सकते हैं। हालांकि, इनकी धरती से दूरी काफी अधिक हो सकती है, लिहाजा इन्‍हें प्रमाणित करने में अभी समय लग सकता है। 

17 विपरीत दिशा में लगाते हैं चक्‍कर 

हवाई में स्थित सुबारू टेलीस्कोप की मदद से इन चंद्रमाओं की खोज करने वाले शोधकर्ताओं में अमेरिका स्थित कार्नेगी इंस्टीट्यूट फॉर साइंस के स्कॉट एस. शेफर्ड भी शामिल रहे। खोज के प्रमुख शेफर्ड के मुताबिक, तलाशे गए सभी चंद्रमाओं का व्यास करीब पांच किलोमीटर है। इनमें से तीन चांद शनि के अपने अक्ष पर घूर्णन की दिशा में उसकी परिक्रमा कर रहे हैं, जबकि 17 विपरीत दिशा में।

परिक्रमा करने में लगता है इतना समय

अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि तीन चांद जो शनि की दिशा में ही उसकी परिक्रमा कर रहे हैं उनमें से दो तीसरे की तुलना में इस गृह के नजदीक हैं। इन दो चंद्रमाओं को शनि की परिक्रमा करने में दो साल का समय लगता है, जबकि तीसरे को अधिक दूरी के कारण तीन साल।

यह मिल सकती है जानकारी

शेफर्ड के मुताबिक, इन चंद्रमाओं की कक्षाओं के अध्ययन से इनकी उत्पत्ति का पता चल सकता है। साथ ही इनकी उत्पत्ति के समय शनि के आसपास की स्थितियों के बारे में भी जानकारी मिल सकती है। इससे शनि की उत्पत्ति के साथ उसमें आए बदलावों के अलावा अन्य गृहों की उत्पत्ति और विकास के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। खोजकर्ताओं में शेफर्ड के अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लास एंजिलिस के डेविड जेविट और हवाई यूनिवर्सिटी के जन क्लेयना भी शामिल रहे।

कहीं बड़े चांद से तो नहीं टूटे ये

शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि ये छोटे-छोटे चांद किसी बड़े चांद से टूटकर बने हो सकते हैं। शेफर्ड के मुताबिक, ये छोटे चांद अपने मुख्य चांद से टूट कर भी शनि की परिक्रमा करने में सक्षम रहे, जो अहम बात है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन से पता लगाया है कि शनि की उल्टी दिशा में परिक्रमा कर रहे चांद अपने अक्ष पर उतना ही झुके हुए हैं, जितना इनसे पूर्व खोजे गए चांद। इससे इस संभावना को और बल मिलता है कि ये सभी चांद एक बड़े चांद से टूट कर बने हैं। शेफर्ड कहते हैं, इस तरह के बाहरी चंद्रमाओं का समूह बृहस्पति के आसपास भी दिखाई देता है। यह इस बात का संकेत करते हैं कि सैटर्नियन प्रणाली में या बाहरी चीजों जैसे क्षुद्रग्रहों या धूमकेतुओं को पार करने के दौरान टकराव हुआ।

पहले भी खोज चुके हैं चांद

शैफर्ड इससे पहले भी इस तरह की खोज कर चुके हैं। वह बृहस्पति की परिक्रमा कर रहे 12 चंद्रमाओं की तलाश कर चुके हैं। बता दें कि कार्नेगी कार्नेगी इंस्टीट्यूट फॉर साइंस ने खोजे गए नए चंद्रमाओं में से पांच के नामकरण के लिए ऑनलाइन प्रतियोगिता भी शुरू की है।

यह भी पढ़ें:

Chandrayaan-2 Photos: ISRO ने जारी की ऑर्बिटर से खींची गई चांद की खूबसूरत तस्वीरें

अब तक की सबसे बड़ी रेडियो दूरबीन खोजेगी नई दुनिया, चीन और फ्रांस के वैज्ञानिक जुटे

Posted By: Sanjay Pokhriyal

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप