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'आने वाले महीनों में दुनिया पर मंडराएगा भीषण खाद्य संकट', विदेश मंत्री जयशंकर की चेतावनी

Published: Thu, 01 Oct 2026 10:30 AM (IST)

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में दुनिया को एक बड़े और गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

HighLights

  1. विदेश मंत्री जयशंकर ने वैश्विक खाद्य संकट की चेतावनी दी।

  2. 4F दबाव, यूक्रेन संघर्ष और जलवायु जोखिम मुख्य कारण।

  3. काला सागर बाधाओं से अनाज निर्यात बुरी तरह प्रभावित।

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। दुनियाभर में एक साथ कई युद्ध चल रहे हैं। इसका प्रभाव भी एक साथ कई सारे क्षेत्र में पड़ता साफ-साफ दिखाई दे रहा है। इन्हीं बढ़ते संकटों के बीच अब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बड़ी चेतावनी सामने आई है।

विदेश मंत्री ने दुनिया को आगाह किया है कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर एक बड़े और गंभीर खाद्य संकट का सामना करना पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की उच्च-स्तरीय बैठक के बाद न्यूयार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने यह चेतावनी दी।

4F का सामना कर रही दुनिया- विदेश मंत्री

जयशंकर ने बताया कि आज विकासशील देश मुख्य रूप से 4F यानी फूड, फ्यूल, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के मोर्चे पर एक गंभीर दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने इस संकट के पीछे यूक्रेन और ईरान-खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष, व्यापार मार्गों में रुकावट और तेजी से बदलते जलवायु जोखिमों को मुख्य वजह बताया है।

अनाज के बड़े निर्यातक देश नहीं भेज पा रहे शिपमेंट

विदेश मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि जब भोजन की बात आती है, तो आज हम ऐसी स्थिति देख रहे हैं जहां दुनिया के कुछ प्रमुख अनाज निर्यातक देश अपना शिपमेंट बाहर भेजने में सक्षम नहीं होंगे।

इसके साथ ही उन्होंने दुनिया भर में खाद की भारी किल्लत और अल नीनो के खतरनाक प्रभावों का भी जिक्र किया, जो मिलकर आने वाले महीनों में एक भयंकर खाद्य संकट पैदा कर सकते हैं।

अनाज की सप्लाई पर क्यों मंडरा रहा है संकट?

बता दें कि इसकी वजह काला सागर है। कारण ऐसे समझिए कि रूस और यूक्रेन दुनिया भर में गेहूं और अन्य अनाजों के बड़े सप्लायर हैं। लेकिन इस क्षेत्र के बंदरगाहों और शिपिंग रूट्स पर लगातार बाधाओं के कारण निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

बड़ी गिरावट और महंगे हुए दाम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर में रूसी गेहूं का निर्यात गिरकर सिर्फ 1 मिलियन टन पर आ गया है, जबकि पिछले साल यह करीब 5 मिलियन टन था। वहीं, यूक्रेन का निर्यात भी घटकर आधा रह गया है। इस सप्लाई संकट के कारण जून के बाद से वैश्विक बाजार में गेहूं की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।

वैकल्पिक रास्तों की तलाश जारी

गौरतलब है कि काला सागर के रास्ते बंद होने या बाधित होने के कारण यूक्रेन अब बाल्टिक बंदरगाहों के जरिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रहा है। हालांकि, इन नए रास्तों से ट्रांसपोर्ट का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और इसके लिए भारी बुनियादी ढांचे व वित्तीय मदद की जरूरत होगी।