बोस्टन, प्रेट्र। बच्चे हमेशा हंसते-खेलते ही अच्छे लगते हैं। अभिभावकों को सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है, जब वे बीमार पड़ जाते हैं और अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते। ऐसे में उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है। वहां अक्सर बच्चों में तनाव घर कर जाता है। इसकी वजह एक तो वहां का माहौल और दूसरा बच्चों के परिवेश में आया एकाएक परिवर्तन होता है।

इस तनाव से बच्चों को निकालने का तरीका वैज्ञानिकों ने तलाश लिया है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार पर पता लगाया है कि रोबोटिक टेडी बियर बच्चों को तनाव मुक्त रखने और उनके मूड को अच्छा रखने में मदद कर सकता है।

बीमारी से उबरने में लगता है समय
अस्पतालों में अक्सर बाल विशेषज्ञ वहां भर्ती बच्चों को तनावमुक्त और खुश रखने के लिए कई तरह के क्रियाकलाप करवाते हैं पर फिर भी कई बार बच्चों के स्वभाव में परिवर्तन नहीं देखा जाता। ऐसे बच्चों को अपनी बीमारी से उबरने के लिए अन्य के मुकाबले ज्यादा समय लगता है। इससे निपटने के लिए अमेरिकी शोधकर्ताओं ने अध्ययन कर यह दावा कि रोबोटिक टेडी बियर बच्चों के लिए सबसे मुफीद हैं।

तीन वर्गों में बांटा
यह अध्ययन पीडियाट्रिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका के बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल की बाल चिकित्सा इकाइयों में भर्ती 50 बच्चों को तीन वर्गो में बांटा और उन्हें पारंपरिक टेडी बियर, रोबोटिक टेडी बियर और वर्चुअल टेडी बियर दिए गए।

अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि रोबोटिक टेडी बियर का प्रयोग करने वाले बच्चों में अन्य के मुकाबले तनाव कम पाया गया। इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 3 से 10 साल के बच्चों को शामिल किया था।

टेडी बियर की खूबियां
रोबोटिक टेडी बियर की खासियत यह है कि यदि बच्चा बहुत छोटा है तो यह उन्हें नर्सरी में गाये जाने वाले गीतों को सुना सकता है और बड़े बच्चों के हर सवाल के जबाव आसानी से दे सका है और उनके साथ घूम फिर भी सकता है। जबकि वर्चुअल रोबोट में स्पाई गेम खलने की सुविधा भी थी। इसमें बच्चों को एक कमरे में छिपी हुई वस्तुओं का अनुमान लगाना होता था।

बच्चों के स्वभाव में परिवर्तन
शोधकर्ताओं ने बताया कि रोबोटिक टेडी बियर के साथ खेलने वाले बच्चे महज कुछ ही दिनों में अपने बिस्तर से उठ खड़े हुए और अस्पताल के प्रांगण में घूमने लगे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बच्चों के स्वभाव में परिवर्तन लाने के लिए उन्हें चिकित्सा के साथ-साथ अन्य शारीरिक और मानसिक क्रियाकलाप कराने भी जरूरी होते हैं। तभी उनका संपूर्ण विकास होता है।

लेकिन जब बच्चे अस्पताल में भर्ती होते हैं तो अक्सर उन्हें केवल चिकित्सा ही मिल पाती है। अन्य क्रियाकलाप नहीं के बराबर कराए जाते हैं। ऐसे में स्वाभाविक है कि बच्चों में तनाव के साथ-साथ अवसाद घर कर जाए। इसीलिए जरूरी है कि उन्हें मानसिक और शारीरिक व्यायाम भी कराया जाए।

Posted By: Dhyanendra Singh

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