वाशिंगटन (प्रेट्र)। वैज्ञानिकों ने शरीर को बाहर से मजबूती देने के लिए एक रोबोटिक एक्सोस्केलटन विकसित किया है, जिसे पहन कर रीढ़ की हड्डी की विकृतियों को सही किया जा सकता है। ये विकृतियां रीढ़ की हड्डी के असामान्य टेढ़ेपन की वजह से पैदा होती हैं। डॉक्टरी भाषा में इन विकृतियों को इडियोपैथिक स्कोलियोसिस और काईफोसिस कहा जाता है। इन विकृतियों से पीड़ित बच्चों को पेट और कूल्हों के इर्द-गिर्द ब्रेस लगाने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस तरह के ब्रेस कठोर, स्थिर और पहनने में असुविधाजनक होते हैं।

इसका लंबे समय तक इस्तेमाल करने से त्वचा पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ये ब्रेस इलाज के दौरान शरीर में होने वाले परिवर्तनों के अनुसार खुद को नहीं ढाल सकते जिसकी वजह से ये बहुत प्रभावी नहीं हो पाते। अब कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने एक नए रोबोटिक स्पाइन एक्सोस्केलटन (रोस) का आविष्कार किया है, जो ब्रेस की इन अधिकांश सीमाओं का समाधान कर सकता है।

इस एक्सोस्केलटन के उपयोग से रीढ़ की हड्डी की विकृतियों के उपचार की नई विधियां विकसित की जा सकती हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुनील अग्रवाल का कहना है कि हमारी टीम द्वारा विकसित ब्रेस पर पहले कोई अध्ययन नहीं हुआ है। रोस पहला ऐसा डिवाइस है जिसने सभी कोणों से शरीर की विस्तृत नापजोख की है।

उन्होंने कहा कि इस आविष्कार से रीढ़ की हड्डी की विकृतियों को चिह्नित करने और उनका बेहतर इलाज करने में मदद मिलेगी। इस डिवाइस को लेकर किए गए अध्ययन में आठ स्वस्थ पुरुषों और रीढ़ की हड्डी की विकृतियों से पीड़ित दो पुरुषों को शामिल किया गया था। इस अध्ययन का मकसद उनके शरीर की त्रिआयामीकठोरता को चिह्नित करना था।