संयुक्त राष्ट्र, एपी। बीता जुलाई माह सबसे गर्म माह के रूप में दर्ज किया गया। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपने सबसे ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटानियो गुतेरस ने कहा कि इसे इतिहास के अब तक के सबसे गर्म माह के रूप में माना जा सकता है।

जलवायु परिवर्तन पर दुनिया को एकजुट होने का आह्वान करते हुए गुतेरस ने चेताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अगर दुनिया एकजुट नहीं हुई तो हमें आने वाले वर्षो में और भी भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

गुतेरस ने गुरुवार को कहा कि जून माह सबसे गर्म रहा, लेकिन जुलाई ने तो जून का भी रिकार्ड तोड़ दिया। इसने इतिहास के सबसे गर्म माह का रिकॉर्ड चाहे न तोड़ा हो, लेकिन वह उसके बराबर जरूर रहा।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछला सबसे गर्म महीना, जुलाई 2016 था, जो सबसे मजबूत अल नीनो के दौरान गर्म रहा, लेकिन इस वर्ष तो अल नीनो भी नहीं था। अल नीनो वायुमंडल के संपर्क में आने के बाद पृथ्वी को गर्म करता है। यह वर्षा और तापमान के पैटर्न को बदल देता है, जिससे कहीं ज्यादा बारिश होती है तो कहीं सूखा पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन पर अगले माह शिखर सम्मेलन
गुतेरस ने कहा कि हाल के मौसम के जो आंकड़े हैं वे यह बताते हैं कि नई दिल्ली से लेकर, पेरिस, सैंटियागो, एडिलेड व आस्ट्रेलिया तक सब भीषण गर्मी से जूझते रहे। एक तरह से 2015 से 2019 वर्ष सबसे गर्म रिकॉर्ड किए गए। गुतेरस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 21 सितंबर को यूथ क्लाइमेट समिट में युवा तथा 23 सितंबर को क्लाइमेट एक्शन समिट में दुनिया के नेता जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।

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