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नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। भारत पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने की दिशा में अब अन्य देश भी रुचि ले रहे हैं जिससे इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध बेहतर हो सके। इस दिशा में चीन ने एक कदम आगे बढ़ाया है। भारत के इस मसले रुख को जानते हुए भी चीन ने अमेरिका के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था कि यदि भारत चाहेगा तो वे इसमें मध्‍यस्‍थ की जिम्‍मेदारी निभाने को तैयार हैं। हालांकि इस दौरान ट्रंप ने यहां तक कहा था कि खुद भारतीय प्रधानमंत्री ने उनसे मुलाकात के दौरान इस बारे में उनकी राय जानी थी। भारत ने ट्रंप के इस बयान को खारिज करते हुए इसको मनगढ़ंत बताया था। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को सुधारने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए अपने देश का समर्थन व्यक्त किया। इससे पहले बीती 22 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाक के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की थी। इन दोनों देशों के बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस पेशकश का स्वागत किया। उनका कहना है कि यह पाकिस्तान की उम्मीद से कहीं बड़ा बयान है। 

गौरतलब है कि अमेरिका इस मामले में मध्यस्थता की पेशकश करने वाला पहला देश नहीं है। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला और नार्वे के प्रधानमंत्री एर्ना सोलबर्ग ने भी इस मसले पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की पेशकश की थी। लेकिन भारत ने सभी देशों के प्रस्तावों को खारिज कर दिया था, जिससे कश्मीर में तनाव बढ़ गया है।

चीन के मुताबिक भारत को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आमतौर पर शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार का समर्थन क्यों करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विवादों के 70 से अधिक वर्षों के दौरान, दोनों देशों में हमेशा बातचीत के प्रभावी पक्ष का अभाव रहा है। नियंत्रण रेखा के आसपास आए दिन झड़पें होती रहती हैं, इन झड़पों में निर्दोष लोगों की जान जाती रहती है।

ऐसी परिस्थितियों में, चीन ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का समर्थन किया है क्योंकि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता का बहुत महत्व है। यदि भारत-पाकिस्तान विवादों में युद्ध या यहां तक ​​कि परमाणु टकराव होता है तो इन दो देशों में लाखों निर्दोष लोग शिकार बन जाएंगे। इस मसले पर तीसरे पक्ष की भूमिका को सही बताने के पीछे चीन का उद्देश्य ईमानदारी से भारत और पाकिस्तान के बीच शांतिपूर्ण वार्ता को बढ़ावा देना है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यह चीन के अपने हितों के लिए भी जरूरी है। 

चीन की सरकारी मीडिया में आई खबर में यहां तक कहा गया है कि भारत को अंतरराष्‍ट्रीय विचार का सम्‍मान करना चाहिए। हालांकि वह ये भी मानता है कि इस पर अंतिम निर्णय भारत को ही लेना होगा। इसकी वजह है कि भारत दक्षिण एशिया का अहम देश है। ऐसे में यदि भारत और पाकिस्तान कश्मीर मसले को ठीक और शांति से हल कर सके तो भारत की अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर छवि काफी बड़ी होगी। चीन ने इस लेख में अपनी पीठ को थपथपाते हुए यहां तक भी कहा है कि उसने इन दोनों को ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का सदस्‍य बनाकर एक मंच दिया है। इस मंच के जरिए भी वह अपने विवादित मसलों को सुलझा सकते हैं। 

आपको बता दें कि भारत पहले ही कश्‍मीर मसले पर तीसरे पक्ष के विचार को खारिज करता आया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आए दिन भारत की शांति को बिगाड़ने का काम करता रहता है। यदि पाकिस्तान को संबंध सुधारने हैं तो पहले अपने यहां से आतंकवाद को खत्म करना होगा। महमूद कुरैशी का कहना है कि भारत को यह समझना चाहिए कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मध्यस्थता की पेशकश कर रहा है क्योंकि भारत ने कश्मीर पर कुछ प्रयास और उपलब्धियां हासिल की हैं, वैश्विक शांति के लिए कश्मीर में शांति महत्वपूर्ण है क्योंकि आए दिन यहां पर ही कोई न कोई गतिविधि होती रहती है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच जाती है।

 

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Posted By: Vinay Tiwari

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