जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पाकिस्तान के जेल में बंद और वहां की एक सैन्य अदालत से फांसी की सजा प्राप्त भारतीय नौ सेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के भाग्य का फैसला 17 जुलाई को हो जाएगा। भारत ने पाक सैन्य कोर्ट के फैसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आइसीजे) में चुनौती दी हुई है और अब तकरीबन दो वर्षो बाद कोर्ट इस पर अपना फैसला सुनाएगा।

आइसीजे ने भारत व पाकिस्तान को इस बारे में सूचना भी भेज दी है। मई, 2018 में आइसीजे के 10 सदस्यीय बेंच ने भारत की अपील पर विचार करते हुए जाधव की फांसी पर तत्कालिक तौर पर रोक लगा दी थी। आइसीजे का फैसला ना सिर्फ जाधव के लिए महत्वपूर्ण होगा बल्कि इसका भारत व पाकिस्तान के रिश्तों पर भी असर पड़ना तय है।

 भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि उन्हें जाधव पर होने वाले फैसले की सूचना दे दी गई है। भारतीय पक्षकार पहले से ही इस बात को लेकर सकारात्मक हैं कि जाधव के मामले पर सकारात्मक फैसला आएगा। इसके पीछे जो वजहें बताई जा रही हैं उसमें दम भी नजर आता है। एक वजह तो यह है कि जाधव को जिस तरह से एक सैन्य कोर्ट ने एक संदेहास्पद कानूनी कार्रवाई में सजा सुनाई है उसको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा से संदेह की नजर से देखा जाता है। साथ ही जाधव को कभी भी भारतीय उच्चायोग की मदद नहीं लेने दी गई ताकि वह अपनी बात सही तरीके से रख सके।

भारत की उम्मीद इसलिए भी मजबूत है कि फरवरी, 2019 में आइसीजे में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के कई अपीलों को खारिज किया जा चुका है। पाकिस्तान की तरफ से यह पेशकश की गई थी वह जाधव का इकबालिया बयान पेश करना चाहता है जिसे आइसीजे ने खारिज कर दिया था। यह वीडियो मार्च, 2016 में ही पाकिस्तान सरकार ने यह कहते हुए जारी किया था कि कुलभूषण ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। भारत ने तभी इस वीडियो की समीक्षा की थी और इसे फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया था। भारत ने अपनी अंतिम अपील में 20 फरवरी, 2019 को कहा था कि पाकिस्तान में दी गई सजा को निरस्त कर देना चाहिए।

क्‍या है भारत का पक्ष
भारत ने अपने हलफनामे में पाकिस्तान पर वियना संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। भारत का पक्ष है कि जाधव को सुनवाई के दौरान कानूनी मदद तक नहीं लेने दी गई। भारत ने पाकिस्तान की सैन्य अदालत में जाधव के खिलाफ गलत आरोपों में एकतरफा सुनवाई पर अपनी आपत्ति जताई। भारत का कहना है कि जाधव अपने व्यापार के सिलसिले में ईरान गए थे, जहां से तालिबान ने उन्हें अगवा करके पाकिस्तानी एजेंसियों को सौंपा। भारत का कहना है कि ईरान से जाधव का अपहरण किया गया था, जहां नेवी से रिटायर होने के बाद वे बिजनेस के लिए गए थे।

पाकिस्तान का तर्क
इसके जवाब में पाकिस्‍तान ने 13 दिसंबर को दिए गए अपने पहले जवाबी हलफनामे में आइसीजे को बताया कि 1963 में कंसुलर रिलेशंस पर हुए वियना संधि के तहत कंसुलर एक्‍सेस राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में जैसे जासूसी या आतंकवाद आदि में गिरफ्तार विदेशी नागरिक को नहीं दी जा सकती। पाकिस्‍तान ने कहा कि चूंकि भारत ने भी इस बात से इन्‍कार नहीं किया कि जाधव मुस्‍लिम नाम के पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे, इसलिए याचिका दर्ज कराने का कोई मामला ही नहीं।

पाक ने कहा कि भारत ने यह नहीं बताया कि एक नेवी कमांडर गलत नाम के साथ कैसे यात्रा कर रहा था। पाक ने यह भी कहा कि उस वक्‍त जाधव ड्यूटी पर थे तो यह निश्‍चित है कि उन्‍हें किसी विशेष मिशन पर जासूसी के तहत भेजा गया था। पाकिस्‍तान का दावा है कि इसके सुरक्षाबलों ने जाधव को 3 मार्च 2016 को गिरफ्तार किया था जब वे ईरान में प्रवेश कर चुके थे।

Posted By: Arun Kumar Singh

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