वाशिंगटन, एजेंसी। चीन की बढ़ती आक्रमकता को रोकने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने जर्मनी के अपने समकक्ष के साथ हेइको मास से फोन पर वार्ता की। दोनों नेताओं ने अन्‍य मुद्दों के अलावा चीन से सामना करने के लिए अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ सहयोग पर चर्चा की। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्‍ता ने कहा कि इस दौरान पोम्पिओ ने जर्मनी के विदेश मंत्री मास के साथ यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के  अध्यक्ष के रूप में जर्मनी की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। पोम्पिओ और जर्मनी विदेश मत्री मास ने कोरोना महामारी के बाद दोनों देशों के आर्थिक हालात पर चर्चा की और आर्थिक मोर्चे पर और यूरोपीय संघ के साथ संयुक्‍त रूप से सहयोग की बात कही। हालांकि, इन चर्चाओं के साथ दोनों नेतओं के बीच मुख्‍य वार्ता चीन को लेकर ही केंद्र‍ित रही।

चीनी प्रवक्‍ता ने अमेरिका को दिया कड़ा जबाव 

इस बीच चीन ने अमेरिकी घेराबंदी पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हम अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज करते हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता झाओ ने कहा कि हम चीनी अधिकारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों पर मजबूती से साथ खारिज करते हैं। उन्‍होंने कहा अमेरिका लगातार चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर हस्‍तक्षेप कर रहा है। प्रवक्‍ता ने जोर देकर कहा यह दोनों देशों के संबंधों के लिए हानिकारक है। चीन ने अमेरिकी संस्थानों और व्यक्तियों के साथ पारस्परिक व्यवहार करने का फैसला किया है। 

अमेरिका ने चीन पर लगाए बड़े प्रतिबंध 

दरअसल, उइगुर मुस्लिमों और हांगकांग को लेकर अमेरिका ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिका ने चीन में उइगुर मुस्लिमों के मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर शीर्ष चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। अमेरिका ने शिनजियांग प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव चेन कुआंगो को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. चेन चीन के ताकतवर पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं। उनके अलावा तीन अन्य चीनी अधिकारियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हॉन्गकॉन्ग और कोरोना वायरस महामारी को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकरार को देखते हुए इस कार्रवाई की संभावना काफी पहले से नजर आ रही थी। हालिया प्रतिबंध के बाद अब चीन और अमेरिका तनाव और बढ़ सकता है। 

Posted By: Ramesh Mishra

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