नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। समुद्र के किनारे फेंके जाने वाले प्लास्टिक कचरे को भी रिसाइकिल किया जा सकता है। इनको सिर्फ रिसाइकिल ही नहीं किया जा सकता है बल्कि इस बेकार प्लास्टिक को बिजली और हाइड्रोजन ईंधन में भी परिवर्तित किया जाएगा। वैज्ञानिकों ने 'दुनिया का पहला' ऐसा तरीका बनाया है, जो बिना उपयोग के प्लास्टिक को ईंधन में बदल सकता है, जिसका इस्तेमाल कारों और घरों को बिजली देने के लिए किया जा सकता है। 

रिसाइकिल न किए जा सकने वाले प्लास्टिक कचरे का होगा निपटारा 

चेस्टर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने उन सामग्रियों पर ध्यान केंद्रित किया जिन्हें रिसाइकिल नहीं किया जा सकता है, जैसे कि खाद्य पैकेजिंग या समुद्र तटों से बरामद प्लास्टिक। उन्होंने कहा कि जो प्लास्टिक कचरा समुद्र के किनारे से बरामद किया जा रहा है उसको नए सिरे से रिसाइकिल करके पर्यावरण के अनुकूल हाइड्रोजन ईंधन और बिजली में बदल दिया जाएगा, ऐसा करने के बाद कोई भी प्लास्टिक शेष नहीं बचेगा। इस तरह की मशीन को डेवलप करने वालों का कहना है कि यह पहली बार है जब विशेषज्ञों ने एक ऐसी विधि पर काम किया है जो सभी प्रकार के गंदे प्लास्टिक का उपयोग करता है और उसके बाद कुछ भी अवशेष नहीं छोड़ता है। 

1000 डिग्री सेल्सियस पर पिघलाया जाएगा 

जो नई प्रक्रिया इजाद की गई है उसके हिसाब से बेकार प्लास्टिक को 1,000 डिग्री सेल्सियस के भट्ठे में पिघलाया जाता है उससे पहले उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाते हैं। जिससे किसी भी तरह से प्लास्टिक का कोई अंश बच ना जाए। इस प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली गैसें फिर ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती हैं। खोज करने के बाद अब इस प्रक्रिया का पेटेंट भी करवा लिया गया है। इस तकनीक को एलेस्मेरे पोर्ट, चेशायर में अपने स्वयं के 54 एकड़ के संयंत्र को न केवल बिजली प्रदान करने में सक्षम होगी, बल्कि एक ही दिन में ग्रिड पर 7,000 घरों के साथ-साथ यूके में दो सप्ताह में 7,000 हाइड्रोजन-ईंधन वाली कारों को ईंधन देने में भी सक्षम हो जाएगा।

पॉवरहॉज एनर्जी के साथ साझेदारी में की गई खोज

इस नई खोज को पॉवरहॉज एनर्जी के साथ साझेदारी में खोजा गया है। इस तरह की खोज से दुनिया भर में महासागरों और समुद्र तटों के किनारे जमा होने वाले प्लास्टिक कचने को खत्म करने में पूरी मदद मिलेगी। इस तरह की खोज में जापानी सरकार पहले ही अपनी दिलचस्पी दिखा चुकी है।

कैसे काम करेगी ये तकनीकी?

समुद्र के किनारे जो प्लास्टिक कचरा मिलता है पहले उसको एक जगह पर जमा किया जाता है। फिर इन सभी को लगभग दो इंच के छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। उसके बाद इन सभी को 1,000 डिग्री सेल्सियस पर सील किए गए कांच के घूमने वाले भट्ठे में जाने से पहले हवा को उसमें से बाहर निकाल दिया जाता है, जो तुरंत प्लास्टिक को पिघला देता है और इसे गैसीकृत कर देता है। इस सिनगैस में बहुत कम सीओ 2 सामग्री होती है और अब इसे एक उद्योग मानक प्रणाली में बदल दिया जाता है, जिसे प्रेशर स्विंग एब्जॉर्प्शन (पीएसए) कहा जाता है, दिन में दो टन हाइड्रोजन निकालने के लिए गैस के शेष भाग का उपयोग गैस इंजनों के माध्यम से बिजली उत्पन्न करने के लिए किया जाता है क्योंकि संयंत्र हाइड्रोजन के उपोत्पाद के रूप में बिजली का उत्पादन करेगा।  

कारों को देगा ईंधन, घरों को करेगा रोशन 

चेस्टर विश्वविद्यालय में थॉर्नटन एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर जो होवे का कहना है कि जिस तकनीक की खोज की गई है वो सभी प्लास्टिक कचरे को उच्च गुणवत्ता, कम कार्बन हाइड्रोजन सिनेगैस में परिवर्तित करती है जो तब गैस इंजनों को बिजली के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रक्रिया का एक उप-उत्पाद बिजली है, जिसका अर्थ है कि अपशिष्ट प्लास्टिक न केवल कारों को ईंधन कर सकता है, बल्कि घर पर रोशनी भी रख सकता है। प्लास्टिक के कचरे से परेशान दुनियाभर के लोगों को इस तकनीक के प्रति जागना होगा। ये नई तकनीक दुनिया के कस्बों और शहरों को बिजली देने में सक्षम होने के साथ अपशिष्ट प्लास्टिक को मूल्यवान बना देगा और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह हमारे अपशिष्ट प्लास्टिक के महासागरों को अब साफ करने में मदद कर सकता है। यदि इस प्रणाली के अच्छे रिजल्ट आए तो इस कुशल प्लास्टिक प्रणाली को तब चीन, भारत, जापान, कोरिया और दक्षिण पूर्व एशिया में कचरे के प्लास्टिक को साफ करने के लिए उतारा जाएगा, जिसमें सस्ते प्लास्टिक कचरे को खरीदने वाले पौधों के साथ कुछ समुद्र तटों से एक निर्धारित शुल्क के लिए लिया जाएगा। 

बेकार प्लास्टिक के निपटारे का मिला हल  

ब्रिटेन, जापान, कोरिया, चीन और दक्षिण पूर्व एशिया में तकनीक को विकसित करने के लिए अनन्य लाइसेंस वाले Waste2Tricity के उपाध्यक्ष हावर्ड व्हाइट ने कहा कि हमें दुनिया की बेकार प्लास्टिक समस्या का हल  मिल गया है। अभी महासागरों की सफाई सभी अच्छी तरह से अच्छी है, लेकिन हमें प्लास्टिक कचरे को पारिस्थितिक तंत्र में प्रवेश करने से रोकने की आवश्यकता है। चेस्टर विश्वविद्यालय की टीम ने इस तकनीक को विकसित करने में मदद की है, जो जल्द ही समुद्र के प्लास्टिक के थोक को खत्म करने और भविष्य के लिए ईंधन की कम लागत और कम कार्बन डाइऑक्साइड हाइड्रोजन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रोल के लिए तैयार हो जाएगी।  

Posted By: Vinay Tiwari

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