वाशिंगटन, एएनआइ: अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने हिमालयी क्षेत्र में भारत से जुड़ी सीमा के करीब चीनी सैन्य निर्माण पर चिंता जताई है। हालांकि, विशेषज्ञों और अधिकारियों को भरोसा है कि भारत, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को जवाब देने में सक्षम है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से फारेन पालिसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीमा पर सैन्य निर्माण चीन की क्षेत्रीय आक्रामकता के अनुरूप है और ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अन्य जगहों पर भी दिखता है। फिलीपींस से जुड़े नवंबर के एक वाकये को उदाहरण के तौर पर लिया जा सकता है, जब चीन ने उसकी आपूर्ति नौकाओं को रोक दिया था।

भारत ने चीन को दिया करारा जवाब

चीन ने पिछले महीने सीमावर्ती क्षेत्र में लंबी दूरी के बमवर्षकों को तैनात किया है, लेकिन भारतीय सेना इनसे निपटने में सक्षम है।फारेन पालिसी ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि भारत ने दूसरे क्षेत्रों की तुलना में चीनी घुसपैठ का करारा जवाब दिया है। दक्षिण चीन सागर में चीनी घुसपैठ का इतना प्रखर विरोध नहीं हुआ। हेरिटेज फाउंडेशन के एशियन स्टडी सेंटर के शोधकर्ता जेफ स्मिथ के अनुसार, 'यह साफ है कि चीन क्षेत्र में दबंगई कर रहा है। भारत ने चीन को करारा जवाब दिया है। भारत डरने वाला नहीं है और धमकी भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

चीनी प्रतिक्रिया को समझने के लिए अमेरिका ने बनाया नया साफ्टवेयर

रायटर के अनुसार, अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने एक नया साफ्टवेयर टूल विकसित किया है, ताकि इस बात का अंदाजा लगाया जा सके कि क्षेत्र में अमेरिकी सेना की तैनाती, समर्थित सेनाओं की गतिविधियों और ताइवान जैसे देशों में संसदीय दल के दौरे पर चीन क्या प्रतिक्रिया देगा। अमेरिका के हिंद-प्रशांत कमान के दौरे पर पहुंचीं उप रक्षा मंत्री कैथलीन हिक्स को मंगलवार को इस साफ्टवेयर टूल्स के बारे में जानकारी दी गई। हिक्स ने खास बातचीत में कहा कि टकराव की आशंकाओं के बीच चुनौतियों को समझने और उसके मुकाबले के लिए तैयार रहना होगा। एक रक्षा अधिकारी ने बताया कि यह टूल रणनीतिक टकराव का आकलन करता है। यह वर्ष 2020 की शुरुआत से उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करता है और निर्धारित करता है कि किन गतिविधियों ने चीन-अमेरिकी संबंधों को प्रभावित किया।

Edited By: Amit Singh