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चीन के खिलाफ जासूसी अभियान की तैयारी में पेंटागन, कारोबारी बनकर काम कर सकते हैं अमेरिकी एजेंट

Published: Fri, 23 Oct 2026 05:42 AM (IST)

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी एजेंट कारोबारी या निजी क्षेत्र के अन्य कर्मचारियों ...और पढ़ें

चीन के खिलाफ जासूसी अभियान की तैयारी में पेंटागन

चीन के खिलाफ जासूसी अभियान की तैयारी में पेंटागन

HighLights

  1. कारोबारी बनकर काम कर सकते हैं अमेरिकी एजेंट, योजना अभी शुरुआती चरण में

  2. रक्षा विभाग ने खबर को बताया गलत, कार्यक्रम के कानूनी अधिकार और ढांचे पर भी सवाल

आईएएनएस, वाशिंगटन। चीन के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन गुप्त जासूसी कार्यक्रम बनाने पर विचार कर रहा है।

द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी एजेंट कारोबारी या निजी क्षेत्र के अन्य कर्मचारियों की पहचान के साथ काम कर सकते हैं, ताकि उनका अमेरिकी सरकार से सीधा संबंध सामने न आए। हालांकि, पेंटागन ने ऐसी किसी पहल की जानकारी से इनकार किया है।

रिपोर्ट में इस योजना से परिचित छह लोगों के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित कार्यक्रम का मकसद चीन और अमेरिका के दूसरे प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाना है। यह पहल अभी योजना बनाने के चरण में है और इसे शुरू नहीं किया गया है।

सीआइए के पूर्व अधिकारी संभाल रहे तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल की देखरेख सीआईए में 39 साल तक सेवा दे चुके टाम राकुसन कर रहे हैं। वह अब उप रक्षा मंत्री स्टीव फाइनबर्ग के वरिष्ठ सलाहकार हैं।

योजना में सैन्य सेवाओं, रक्षा विभाग के खुफिया अधिकारियों और सीआइए के पूर्व अधिकारियों से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कार्यक्रम के लिए पेंटागन में अलग इकाई बनाई जाएगी या मौजूदा गुप्त खुफिया व्यवस्था का विस्तार किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस की संबंधित समितियों को भी इसकी जानकारी दिए जाने के संकेत नहीं मिले हैं।

पेंटागन ने दावे को नकारा

पेंटागन के उप प्रेस सचिव जैकब ब्लिस ने द वाशिंगटन पोस्ट से कहा कि खबर में लगाए गए दावे गलत जानकारी पर आधारित लगते हैं। सीआइए ने टिप्पणी करने से इन्कार किया, जबकि राकुसन ने भी सवालों का जवाब नहीं दिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन आर्थिक दबाव को विदेश नीति के अहम औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इसमें शुल्क, निर्यात नियंत्रण, रणनीतिक संसाधनों में निवेश और आर्थिक खुफिया जानकारी जुटाना शामिल है।

सीआइए के उप निदेशक माइकल एलिस ने सितंबर में कहा था कि चीन के खिलाफ जासूसी का दायरा बढ़ाया जा रहा है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत चिप जैसे क्षेत्रों में।