वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिकी सांसदों ने चीन में उइगर मुस्लिमों के हाल पर पाकिस्तान, तुर्की और खा़़डी देशों की चुप्पी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि दुनियाभर में रोहिंग्या शरणार्थियों के समर्थन में प्रयास करने वाले इन देशों की उइगर मामले में चुप्पी अपमानजनक है। अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्राड शरमन ने कहा, 'हम विशेषष रूप से मुस्लिम राष्ट्रों से पूछ रहे हैं, जो इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे। बात चाहे तुर्की की हो, पाकिस्तान की या खाड़ी देशों की, वे रोहिंग्याओं के मामले में थोड़ी सहायता करते हैं और उइगर मामले में पूरी तरह पीठ दिखा देते हैं।'

चीन के स्वायत्त क्षेत्र शिनजियांग में अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिम समुदाय पर प्रशासन की ओर से उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं। एक मानवाधिकार संस्था का कहना है कि चीन ने 2016 से अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अभियान चलाया हुआ है। फिलहाल इसके शिविरों में उइगर समुदाय के कम से कम 10 लाख लोग रह रहे हैं। शरमन ने कहा कि चीन ब़़डे पैमाने पर उइगर आबादी का दमन कर रहा है। कांग्रेस की एक कमेटी के समक्ष बोर्ड ऑफ उइगर ढ्ढह्यूमन राइट्स प्रोजेक्ट के चेयरमैन नूरी टर्केल ने कहा कि चीन का साथ देने का पाकिस्तान का एक डरावना इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मलेशिया के नेता अनवर इब्राहिम इकलौते मुस्लिम नेता हैं, जिन्होंने उइगर आबादी के मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता जताई है। पाकिस्तान इस कदर चीन के समर्थन में है कि वह पाकिस्तानी मूल के उइगरों के उत्पीड़न पर चुप है। उइगर छात्रों को वापस भेजने को लेकर खाड़ी देशों विशेषकर यूएई और मिस्र का भी डरावना रिकॉर्ड रहा है।

मलेशिया की पिछली सरकार ने भी कुछ उइगरों को चीन को सौंपा था। कांग्रेस सदस्य टेड योहो ने आरोप लगाया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी क्रूर तरीकों से शिनजियांग की पहचान को खत्म कर रही है। अधिकारियों ने इस जगह को तकनीक से लैस सैन्य निगरानी वाला इलाका बना दिया है। कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबेशर का आरोप है कि म्यांमार में मुस्लिमों के नरसंहार के पीछे भी चीन सरकार का हाथ है।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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