न्यूयॉर्क, आइएएनएस। वैज्ञानिकों ने गर्भाशय कैंसर के लिए जिम्मेदार एक जीन की खोज की है। यह जीन पिता से पुत्री को मिलता है। एक शोध में पाया गया है कि पिता से मिले एक्स-क्रोमोजोम से यह जीन बेटी में आता है जो आगे चलकर गर्भाशय कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है।

अमेरिका के बफैलो स्थित कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसी कारण एक परिवार की कई बेटियां गर्भाशय कैंसर से पीड़ित हो जाती हैं। दरअसल पिता के क्रोमोजोम से ही बच्चे का लिंग निर्धारित होता है। पिता के पास एक्स और वाय दोनों क्रोमोजोम होते हैं। एक पिता की सभी बेटियों को एक ही क्रोमोजोम मिलता है, जिससे उन सभी के गर्भाशय कैंसर से ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है।

वैज्ञानिकों ने गर्भाशय कैंसर से ग्रसित 186 महिलाओं के क्रोमोजोम की सिक्वेंसिंग की। अध्ययन में सामने आया कि एक्स क्रोमोजोम में मौजूद बीआरसीए नामक जीन गर्भाशय कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है। इससे कैंसर का पता लगाने के साथ ही आनुवांशिक तरीके से उसके इलाज में आसानी होगी। आगे के शोध में इस जीन की क्रिया से संबंधित और जानकारियां जुटाई जाएंगी। गर्भाशय कैंसर की तरह दादी के जीन से पिता और उनके बच्चों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा हो सकता है।

Posted By: Tilak Raj

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