वाशिंगटन, एएनआइ। अमेरिका ने 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का समर्थन किया। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपिओ ने कहा कि इस फैसले से भारत की संप्रभुता के साथ अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

भाााारत के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री, रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि केंद्र सरकार ने देश की सलामती, सुरक्षा, रक्षा, संप्रभुता और अखंडता के लिए 59 ऐप्‍स पर प्रतिबंध लगाया गया।

अमेरिका में भी टिक टॉक पर रोक लगाने की मांग

अमेरिका की सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े सांसदों ने टिक टॉक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए ट्रंप प्रशासन से इस पर रोक लगाने की मांग की है। बता दें कि भारत ने सोमवार को टिक टॉक और यूसी ब्राउजर समेत चीन से जुड़े 59 एप पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि ये एप देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा हैं। गलवन घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प के बाद भारत सरकार ने यह कदम उठाया है। इस झड़प में 20 भारतीय जवान जहां शहीद हो गए थे वहीं 40 से अधिक चीनी सैनिक मारे गए थे।

टिक टॉक को जाना ही होगा

रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर जॉन कॉर्निन ने वाशिंगटन पोस्ट की खबर को टैग करते हुए एक ट्वीट में कहा, 'सीमा पर चीन के साथ हुए टकराव के बाद भारत ने टिक टॉक समेत दर्जनों चीनी एप पर प्रतिबंध लगा दिया है।' एक अन्य रिपब्लिकन सांसद रिच क्रॉफर्ड ने ट्वीट करते हुए कहा, 'टिक टॉक को जाना ही होगा। इसे तो पहले ही चला जाना चाहिए था।'

बता दें कि पिछले सप्ताह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट ओ ब्रायन ने आरोप लगाया था कि चीन सरकार अपने उद्देश्यों के लिए टिक टॉक का उपयोग कर रही है। बता दें कि संघीय सरकार के अधिकारियों द्वारा टिक टॉक के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाले दो विधेयक अमेरिकी संसद में लंबित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अमेरिका में यह मांग और जोर पकड़ेगी।

देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक

लद्दाख में चीन के साथ जारी तनातनी के बीच सरकार ने चीन के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए चीन से संबंध रखने वाले 59 मोबाइल एप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस सूची में लोकप्रिय एप टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, हेलो, शेयर इट जैसे एप्स भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि ये एप्स देश की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक हैं। इन चाइनीज एप्स के सर्वर भारत से बाहर मौजूद हैं। इनके जरिये यूजर्स का डाटा चुराया जा रहा था।

टिकटॉक ने जारी किया बयान 

मंगलवार को टिक टॉक के भारत प्रमुख निखिल गांधी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि कंपनी भारतीय कानून के तहत सभी डेटा गोपनीयता और सुरक्षा आवश्यकताओं के साथ है और भारत में अपने उपयोगकर्ताओं की कोई भी जानकारी किसी भी विदेशी सरकार के साथ साझा नहीं की है, जिसमें चीनी सरकार भी शामिल है।

टिक टॉक के सीइओ केविन मेयर का संदेश

टिक टॉक में इंटरनेट को लोकतांत्रिक बनाने की हमारी प्रतिबद्धता द्वारा हमारे प्रयासों को निर्देशित किया जाता है। काफी हद तक, हम मानते हैं कि हम इस प्रयास में सफल रहे हैं। हमारे मंच को भारत में एक दुर्भाग्यपूर्ण चुनौती का सामना करना पड़ा है। हालांकि, हम अपने मिशन के लिए संकल्पबद्ध और प्रतिबद्ध हैं, और हितधारकों के साथ मिलकर उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। टिक टॉक (TikTok) भारतीय कानून के तहत सभी डाटा गोपनीयता और सुरक्षा आवश्यकताओं का पालन करना जारी रखता है और उपयोगकर्ता की गोपनीयता और अखंडता पर सर्वोच्च महत्व रखता है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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