वाशिंगटन, प्रेट्र। दो देशों के बीच काल्पनिक परमाणु युद्ध की त्रासदी का आकलन करने वाले एक अध्ययन के मुताबिक, इसका सबसे बुरा प्रभाव महासागरों पर पड़ेगा, जिससे समुद्रों में अम्ल की मात्रा में वृद्धि होगी और कोरल, सीप समेत कई अन्य समुद्री जीव प्रभावित होंगे।

जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नामक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने परमाणु युद्ध से उपजने वाले जलवायु परिवर्तन का महासागरों पर पड़ने वाले प्रभावों का पता लगाया है।

बदल जाएगी समुद्र की केमिस्ट्री

अमेरिका की रटगर्स यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलन रोबॉक ने कहा, 'परमाणु युद्ध से समुद्र की केमिस्ट्री बदल जाएगी। पूरी दुनिया का मौसम चक्र बुरी तरह प्रभावित हो जाएगा और महासागरों के ऊपर कार्बन की मात्रा बढ़ने इनमें अम्लीकरण कई गुना बढ़ सकता है।'

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल का प्रयोग किया, जिसमें यह दर्शाया गया है कि परमाणु हथियारों के विस्फोट से ऊपरी वायुमंडल में ब्लैक कार्बन की मात्रा कैसे बढ़ती है।

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने कई तरह के काल्पनिक परमाणु युद्धों पर विचार किया, जिनमें भारत और पाकिस्तान के बीच छोटा और अमेरिका और रूस के बीच अपेक्षाकृत एक बड़ा युद्ध भी शामिल था।

कार्बोनेट आयनों का स्तर होता है कम

शोधकर्ताओं ने बताया कि जीवाश्म ईधन के जलने से अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड समुद्र में प्रवेश कर सकती है और कार्बोनिक एसिड बनाने के लिए पानी के साथ प्रतिक्रिया करती है, जिससे समुद्र और अधिक अम्लीय होता है और कार्बोनेट आयनों का स्तर कम होता है। नेशनल ओशियन एंड एटमॉस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा कि कोरल, सीप जैसे कई अन्य समुद्री जीव-जंतु कार्बोनेट आयनों की मदद से अपना आवरण बनाते हैं और इनका कंकाल भी इसी से बना रहता है।

बढ़ेगा का ठंड का प्रकोप

शोधकर्ताओं ने कहा कि अत्यधिक अम्लीय महासागर समुद्री जीवों को अपने आवरण और कंकाल को बनाने और बनाए रखने के लिए में परेशानी पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि परमाणु युद्ध के कारण भारी मात्रा में वायुमंडल में घुली धुंध सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक आने से रोकती है। इससे वैश्विक स्तर पर ठंड का प्रकोप बढ़ने लगता है, जिसके कारण विस्फोट के अगले पांच साल तक समुद्री सतह पर पीएच के स्तर में भी वृद्धि होगी और अम्ल के स्तर पर मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है।

भोजन मिलना भी हो जाएगा कठिन

शोधकर्ताओं ने कहा कि ठंडक बढ़ने से लगभग 10 साल तक कार्बोनेट आयन के स्तर पर गिरावट आ सकती है और समुद्री जीवों को अपने रखरखाव केलिए कई तरह की चुनौतियों की सामना करना पड़ेगा। रोबॉक ने कहा, 'यह तो हम जानते ही हैं कि परमाणु युद्ध के कारण होने वाले जलवायु परितर्वन के कारण कृषि भूमि पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है। लेकिन यह भी सच है कि इससे समुद्री परितंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होता है। ऐसे में युद्ध के बाद बचे हुए लोगों को समुद्र से भोजन मिल पाना भी कठिन हो जाएगा।

Posted By: Dhyanendra Singh

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