नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। वैज्ञानिकों का सौरमंडल और सौरमंडल के आसपास मौजूद ग्रहों के बारे में जानकारी करने के लिए उत्सुकता बनी हुई है। इसके लिए वो नए-नए तरह के उपग्रह सौरमंडल में भेजते रहते हैं और नई-नई खोजें करते रहते हैं। इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए यूरोप ने एक बड़ी दूरबीन सौरमंडल में भेजी है। इस दूरबीन को चेयोप्स नाम दिया गया है। ये दूरबीन सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों के बारे में जानकारी जुटाने का काम करेगी। यूरोपीय वैज्ञानिक इसे एक महत्वाकांक्षी कदम बता रहे हैं। 

क्या काम करेगी दूरबीन 

ये दूरबीन हमारे सौरमंडल से बाहर के ग्रहों का घनत्व, संरचना और उनके आकार का पता लगाएगी। यूरोपीय स्पेस एजेंसी के मुताबिक यह ऐसे चमकीले तारों के बारे में जानकारी जुटाएगी जिनके इर्द गिर्द उपग्रहों के चक्कर लगाने के बारे में वैज्ञानिक पहले से ही जानते हैं। फ्रेंच गुयाना में नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डिडियर क्वेलोज ने बताया कि "चेयोप्स 710 किलोमीटर दूर है, ठीक वहां पर जहां हम इसे रखना चाहते थे, यह बिल्कुल सही है। कैरेक्टराइजिंग एक्सोप्लेनेट्स यानी बाहरी ग्रहों के बारे में जानकारी जुटाने को संक्षिप्त रूप से चेयोप्स कहा जाता है, अंतरिक्ष में जाने वाली दूरबीन को यही नाम दिया गया है। 

सोयूज रॉकेट का किया गया इस्तेमाल 

यह दूरबीन रूस में बने सोयूज रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजी गई। इस साल सोयूज रॉकेट की यह अंतरिक्ष में तीसरी उड़ान थी। कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से लॉन्च में थोड़ी देरी हुई लेकिन आखिरकार यह पूरी तरह से सफल रहा। क्वेलोज और उनकी सहयोगी मिषेल मेयर ने 24 साल पहले सौरमंडल से बाहर के पहले ग्रह की खोज की थी। अब तक 4000 ऐसे ग्रहों की खोज हो चुकी है।

ब्रह्मांड में जितने तारे उतने ही तारामंडल 

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ब्रह्मांड में जितने तारे हैं कम से कम उतने ही तारामंडल भी हैं और इनकी तादाद 100 अरब से ज्यादा है। वैज्ञानिक इस मिशन के जरिए उनका विस्तार से अध्ययन करना चाहते हैं। लंबे समय से दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं के बारे में जानने की उत्सुकता रही है। इसके साथ ही हमारी पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई यह जानने के लिए भी इंसान बहुत पहले से कोशिश करता आ रहा है। इस दूरबीन की मदद से मिलती जानकारियां इस दिशा में वैज्ञानिकों को आगे ले जाएंगी। 

पृथ्वी से 700 किलोमीटर दूर रहकर करेगा तारों का अध्ययन 

दूरबीन वाला उपग्रह पृथ्वी से 700 किलोमीदर की दूरी पर मौजूद कक्षा में रहेगा और कई प्रकाश वर्ष दूर मौजूद तारों का अध्ययन करेगा। क्वेलोज के मुताबिक इस बात के आसार कम हैं कि यह दूसरे ग्रहों पर जीवन के बारे में हमारी उत्सुकता का समाधान कर सकेगा, हालांकि जीवन की उत्पत्ति को समझने के लिए हमें इन ग्रहों की भूभौतिकी (जियोफिजिक्स) को समझना होगा।

अहम होगी पहली जानकारी 

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मुताबिक यह काम कुछ महीनों के भीतर होगा। जब इस दूरबीन से पहली जानकारी मिलेगी तो ये किसी जादू से कम नहीं होगा। सोयुज अपने साथ इस दूरबीन के अलावा कुछ और उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में लेकर गया है, उससे भी कुछ डेटा मिलेंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मिशन के जरिए ग्रहों से निकलने वाले प्रकाश की मात्रा को विशेषज्ञ माप सकेंगे, इससे उनकी सतह और वातावरण के बारे में नई जानकारी हासिल होगी।  

Posted By: Vinay Tiwari

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