न्यूयॉर्क [न्यूयॉर्क टाइम्स]। कोरोना महामारी की आफत के बीच मुनाफा कमाने के लिए ठगी के नायाब कारनामें भी सामने आने लगे हैं। न्यूयॉर्क में प्रशासन के स्तर पर एक अजब मामला सामने आया। यहां प्रशासन ने सिलिकॉन वैली के एक ऐसे इंजीनियर को करोड़ों के वेंटिलेटर का ऑर्डर दे दिया, जिसने कभी एक भी वेंटिलेटर नहीं बेचा था। हालांकि बाद में जब अधिकारियों ने इसकी पड़ताल की तो उसका भेद खुल गया। पढ़ें द न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की दिलचस्‍प रिपोर्ट...

28 पन्ने का भेजा कैटलॉग

दरअसल, यहां के एक इंजीनियर यारोन ओरेन पाइंस ने फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी को कहा कि वह कोरोना के मरीजों के इलाज में मदद के लिए चीन के रास्ते अस्पतालों को हजारों वेंटिलेटर की आपूर्ति कर सकता है। एजेंसी ने इंजीनियर से विस्तृत जानकारी देने को कहा। 12 घंटे के भीतर उसने 28 पन्ने का एक डिजिटल कैटलॉग बनाकर एजेंसी को भेज दिया।

...और झांसे में आ गए अधिकारी

यारोन ओरेन पाइंस ने वेंटिलेटर के साथ-साथ मास्क और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति की भी बात कही। कैटलॉग में उसने यह शर्त भी रख दी कि कोटेशन के चार घंटे के भीतर ही इच्छुक खरीदार को कांट्रेक्ट साइन करना होगा और ऑर्डर का पूरा पैसा पहले चुकाना होगा। इसमें कोई मोलभाव नहीं हो सकेगा। फेडरल अधिकारियों ने वेंडर की जानकारी न्यूयॉर्क के वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी।

नहीं था मेडिकल इक्विपमेंट

बाद में पाया गया कि इंजीनियर ओरेन पाइंस के पास मेडिकल इक्विपमेंट बेचने का कोई अनुभव नहीं था। हालांकि इसके बावजूद देखते ही देखते ओरेन पाइंस को 8.6 करोड़ डॉलर (करीब 650 करोड़ रुपये) का 1,450 वेंटिलेटर का ऑर्डर मिल गया। अमेरिका में कोरोना महामारी फैलने के बाद से यह सबसे बड़े कांट्रेक्ट में से था।

संदिग्ध लेनदेन के चलते रुका फंड

सौदे के कुछ ही दिन के भीतर एक बैंक ने प्रशासन की तरफ से ओरेन को भेजा गया फंड रोक दिया। बैंक को ओरेन पाइंस के खाते से हुआ एक लेनदेन संदिग्ध मिला था। इसके बाद ओरेन पाइंस और उसके सहयोगियों ने अधिकारियों से कहा कि आपूíत में कुछ दिक्कतों के चलते वेंटिलेटर की आपूर्ति इजरायल के रास्ते की जाएगी, वहां उनके कुछ परिचित हैं। फिर ओरेन पाइंस और उसके सहयोगियों ने प्रशासन पर कांट्रेक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाना शुरू कर दिया।

रद हो गया सौदा

घटनाक्रम को देखते हुए राज्य के अधिकारियों ने चीन में उस स्टॉक का पता लगाने का प्रयास किया, जिसकी बात इंजीनियर ने की थी। अधिकारियों को ऐसे किसी स्टॉक का पता नहीं लग पाया और कांट्रेक्ट रद कर दिया गया। गवर्नर एंड्र्यू कुओमो के कार्यालय ने बताया कि सौदा इसलिए रद किया गया क्योंकि महामारी के कारण लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दर अनुमान से धीमी रही और वेंटिलेटर की जरूरत कम हो गई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर पैदा कर दिया है कि महामारी के कारण बनी परिस्थितियों में किस तरह से करदाताओं के करोड़ों रुपये दांव पर लग गए थे।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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