विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कौन हैं भारतवंशी नील कात्याल? जिनकी दलीलों के आगे SC में ट्रंप की एक ना चली, टैरिफ पर पलट गया फैसला

Published: Sat, 21 Feb 2026 10:10 AM (IST)Updated: Sat, 21 Feb 2026 10:30 AM (IST)

भारतीय मूल के अमिरेकी वकील नील कात्याल ने अमेरिकी अदालत में राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों के खिलाफ पैरवी की। ...और पढ़ें

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कात्याल वैश्विक चर्चा में आ गए हैं। दरअसल, नील कात्याल सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत हासिल की।

दरअसल, अमेरिकी अदालत में पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल कात्याल ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति द्वारा 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) का उपयोग करके मनमाने ढंग से टैरिफ लगाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि असंवैधानिक भी है।

भारतीय मूल के अमिरेकी वकील नील कात्याल के तर्क के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें ट्रंप को हार मिली है। वहीं, नील कल्याण को जीत। इस ऐतिहासिक जीत के कारण कल्याण चर्चित चेहरे के रूप में उभरे हैं।

राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन...

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायाल के फैसले के तुरंत बाद भारतीय मूल के अमिरेकी वकील नील कात्याल ने कहा, "आज, संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के शासन और पूरे अमेरिका के लिए अपना पक्ष रखा। इसका संदेश सीधा था- राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन हमारा संविधान उससे भी अधिक शक्तिशाली है। अमेरिका में, केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर कर लगा सकती है।"

यह मामला किसी एक राष्ट्रपति से जुड़ा नहीं

कात्याल ने इस फैसले को संवैधानिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा, "अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हमारे कानूनी मामले में हमारी हर मांग पूरी कर दी। सब कुछ। "यह मामला हमेशा से राष्ट्रपति पद से जुड़ा रहा है, किसी एक राष्ट्रपति से नहीं।

यह हमेशा से शक्तियों के पृथक्करण से जुड़ा रहा है, न कि तात्कालिक राजनीति से। मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि हमारा सर्वोच्च न्यायालय, जो 250 वर्षों से हमारी सरकार की आधारशिला रहा है, हमारे सबसे मूलभूत मूल्यों की रक्षा कर रहा है।"

कौन हैं नील कत्याल?

  • भारतीय अप्रवासी माता-पिता के घर जन्मे कात्याल ने अपना करियर महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों से जुड़े मामलों में बनाया है।
  • 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए कात्याल ने देशभर में सर्वोच्च न्यायालय और अपीलीय न्यायालयों के समक्ष संघीय सरकार का प्रतिनिधित्व किया।
  • उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 50 से अधिक मामलों में पैरवी की है, जो अल्पसंख्यक अधिवक्ताओं के लिए एक रिकॉर्ड है।
  • नील कत्याल मूल तौर पर एक प्रमुख भारतीय-अमेरिकी वकील और अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रहे हैं। काल्याल वाशिंगटन मिलबैंक एलएलपी में भागीदार हैं।
  • कत्याल मिलबैंक में शामिल होने से पहले कत्याल ओबामा प्रशासन के तहत कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्यरत थे।
  • मिवबैंक वेबसाइट के पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, उनका व्यवसाय पेटेंट, प्रतिभूति, आपारधिक, रोजगार और संवैधानिक कानू में अपीलीय और जटिल मुकदमेबाजी पर केंद्रित है।
  • साल 2011 में नील को न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार भी मिला है।

यह भी पढ़ें- आ गई वो तारीख जब लागू होगा ट्रंप का नया टैरिफ, व्हाइट हाउस तैयारियों में जुटा; SC के एक्शन का रिएक्शन

यह भी पढ़ें- कौन हैं रिक वोल्डनबर्ग, कैसे एक टॉयमेकर ने टैरिफ पर ट्रंप को दी सुप्रीम कोर्ट में मात?

यह भी पढ़ें- 'India US Trade Deal में नहीं होगा बदलाव, भारत टैरिफ देगा, US नहीं', SC के फैसले के बाद क्या बोल गए ट्रंप

यह भी पढ़ें- 'पीएम मोदी महान व्यक्ति, लेकिन भारत को टैरिफ देना ही होगा'; कोर्ट के फैसले के बाद ट्रेड डील पर बोले ट्रंप