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ISRO की क्षमता का नासा भी हुआ मुरीद, अंतरिक्ष सहयोग बढ़ाने पर जताया भरोसा

Published: Mon, 21 Sep 2026 04:00 AM (IST)

नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की क्षमताओं और उपलब्धियों की सराहना की है, साथ ही दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है।

नासा ने इसरो की क्षमता को सराहा

नासा ने इसरो की क्षमता को सराहा

HighLights

  1. नासा ने इसरो की अंतरिक्ष क्षमताओं और उपलब्धियों की सराहना की।

  2. अमेरिका-भारत अंतरिक्ष साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई गई।

  3. निसार मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान में सहयोग पर जोर।

डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की क्षमता और अंतरिक्ष क्षेत्र में उसकी उपलब्धियों की सराहना की और दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है।

नासा के सहायक प्रशासक एवं मुख्य इंजीनियर अमित क्षत्रिय ने ‘इंट्रेपिड म्यूजियम’ में पीटीआई के साथ बातचीत में कहा, हम पहले से ही इसरो के साथ असाधारण सहयोग कर रहे हैं।

नासा और इसरो की साझेदारी वाले निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) मिशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि साइंस मिशन के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षेत्र में इसरो जिस तरह अद्भुत क्षमता विकसित कर रहा है, उसे देखना अविश्वसनीय है। हम भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं। निसार पृथ्वी का अध्ययन करने वाला उपग्रह है। इसे जुलाई 2025 में प्रक्षेपित किया गया था।

उन्होंने कहा, नासा इसरो के साथ अपने अनुभवों से मिली सीख को साझा करता है। भारत ने 70 से अधिक देशों के साथ मिलकर आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह नागरिक अंतरिक्ष खोज के लिए दिशा-निर्देश देने वाले ऐसे सिद्धांत हैं जो कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं। यह प्रतिबद्धता है कि हम इस तरह अन्वेषण करेंगे, जिसमें एक-दूसरे की संप्रभुता और लोकतांत्रिक देशों के रूप में हमारे मूल्यों का सम्मान होगा।

अमित द्वितीय विश्व युद्ध के विमानवाहक पोत के नाम पर बने इंट्रेपिड म्यूजियम में आयोजित परिचर्चा में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क में थे। यह कार्यक्रम नासा के प्रोटोटाइप ऑर्बिटर ‘एंटरप्राइज’ के सार्वजनिक प्रदर्शन के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था। ‘प्रोटोटाइप आर्बिटर’ ऐसा परीक्षण मॉडल होता है जिसे किसी नए अंतरिक्षयान या मिशन की तकनीक और डिजाइन को परखने के लिए बनाया जाता है।

परिचर्चा में नासा के पूर्व प्रशासक चार्ल्स एफ. बोल्डेन जूनियर तथा एक्सिओम स्पेस की मानव अंतरिक्ष उड़ान निदेशक पेगी व्हिटसन ने भी शिरकत की। व्हिटसन ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ अपने सहयोग के बारे में बताया। शुभांशु एक्सिओम मिशन-4 के पायलट थे।

शुभांशु ने एक्सिओम मिशन-4 के दौरान व्हिटसन, पोलैंड के स्लावोस्ज उजनांस्की-विस्निव्स्की और हंगरी के तिबोर कापू के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिनों तक रहकर शोध किया था।

वैश्विक अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत के योगदान को रेखांकित करते हुए बोल्डेन ने कहा, अपने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला देश कौन था। इसका जवाब है- भारत। भारत का पहला अंतरग्रहीय मंगल मिशन ‘मंगलयान’ या मार्स आर्बिटर मिशन (एमओएम) नवंबर 2013 में पीएसएलवी-सी25 के जरिए प्रक्षेपित किया गया था।