वाशिंगटन, पीटीआइ। मंगल ग्रह के राज खोलने की दिशा में नासा प्रतिदिन नई-नई खोज कर रहा है। नासा अब इस लाल ग्रह के अध्ययन के लिए उसके वायुमंडल में हेलीकॉप्टर उड़ाने जा रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि उन्होंने ‘मंगल हेलीकॉप्टर’ का सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर लिया है। इस हेलीकॉप्टर को कम घनत्व वाले वातावरण और कम गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्र में उड़ान भरने के लिए तैयार किया गया है। इसे जुलाई 2020 में मंगल ग्रह के लिए रवाना किया जाएगा। यह फरवरी 2021 में इसकी सतह पर पहुंचेगा।

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस हेलीकॉप्टर का भार 1.8 किलोग्राम से ज्यादा नहीं है। इस प्रोजेक्ट का बहुत बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह मंगल के वातावरण में बिना बाधा काम कर सके। बताया कि हेलीकॉप्टर को मंगल में बहुत ही कम तापमान में उड़ान भरनी होगी यह तापमान माइनस 90 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है। तय कार्यक्रम के अनुसार हेलीकॉप्टर फरवरी 2021 में मंगल पर पहुंचेगा।

कुछ महीने के बाद यह व्यवस्थित तरीके से उड़ान भरने लगेगा। दूसरी दुनिया की सतह से किसी हेलीकॉप्टर की यह पहली उड़ान होगी। इस हेलीकॉप्टर को नासा की जेट प्रोपेल्सन लेबोरेटरी ने तैयार किया है। प्रोजेक्ट मैनेजर मिमि आंग ने बताया कि पृथ्वी पर मंगल जैसा वातावरण बनाकर हेलीकॉप्टर का परीक्षण करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल काम था। आंग ने बताया कि मंगल ग्रह के वायुमंडल का घनत्व पृथ्वी के वायुमंडल के घनत्व का मात्र एक प्रतिशत है। आंग ने सफल परीक्षण के बाद खुशी जताते हुए कहा कि हम निश्चित ही मंगल पर हेलीकॉप्टर उड़ाने जा रहे हैं।

इस तरह टीम ने किया परीक्षण

आंग ने बताया कि टीम ने इस परीक्षण के लिए एक वैक्यूम बनाया। उसके अंदर से नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और अन्य गैसों को निकाल दिया गया। इसके बाद उसमें कार्बन डाइऑक्साइड और मंगल के वायुमंडल के मुख्य घटकों को डाल दिया गया। जेपीएल में हेलीकॉप्टर की परीक्षण कंडक्टर टेडी टेजेटोस ने बताया कि इसी तरह से उन्होंने पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण को भी दो तिहाई तक कम कर दिया, क्योंकि मंगल का गुरुत्वाकर्षण बहुत कमजोर हैं। महज एक मिनट की उड़ान सफलतापूर्वक रही है। आंग ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर कार्बन फाइबर, फ्लाइट ग्रेड एल्युमिनियम, सिलिकान, तांबा आदि से मिलकर बना है। इसमें सोलर पैनल हैं जो बैटरियों को चार्ज करेंगे।

 

Posted By: Dhyanendra Singh