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'अमेरिका फर्स्ट' समर्थकों के गुस्से के बीच भारत पहुंचे मोंटाना के गवर्नर, बेचेंगे दाल

Published: Wed, 07 Oct 2026 12:54 PM (IST)

मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट भारत में अपने राज्य की दालें बेचने के लिए दौरे पर हैं, जिसका उद्देश्य मोंटाना के किसानों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच बनाना है।

मोंटाना के गवर्नर की भारत यात्रा।

मोंटाना के गवर्नर की भारत यात्रा।

HighLights

  1. मोंटाना के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट भारत में दालें बेचने पहुंचे।

  2. MAGA समर्थकों ने 'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर कड़ा विरोध जताया।

  3. भारतीय मूल के प्रोफेसरों को भी इस विवाद में निशाना बनाया गया।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका के मोंटाना राज्य के गवर्नर ग्रेग जियानफोर्ट इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। उनका मकसद मोंटाना के किसानों की दाल मसूर, चना और मटर को भारत के 1.4 अरब लोगों के बाजार तक पहुंचाना है। लेकिन उनके इस व्यापारिक दौरे ने अमेरिका की घरेलू राजनीति, खासकर मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) गुट के भीतर एक जोरदार भूचाल ला दिया है।

दाल का कारोबार और मोंटाना का 'मिशन इंडिया'

बता दें कि मोंटाना अमेरिका में दाल और छोले का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, जबकि भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता और आयातक देश है।

इससे पहले साल 2025 में भारत ने मोंटाना से जो मटर, मसूर और चना खरीदा था, उसका बड़ा हिस्सा मुर्गी के चने के रूप में इस्तेमाल हुआ था, जिसका कुल मूल्य करीब 1.4 करोड़ डॉलर था। भारत अभी अमेरिका का 29वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

मोंटाना को क्यों पड़ी भारतीय बाजार की जरूरत?

इस बात को ऐसे समझिए कि मोंटाना की कुल आबादी महज 10 लाख के आसपास है, जो भारत के किसी मोफस्सिल या छोटे कस्बे जितनी है। ऐसे में, मोंटाना के किसानों को अपने राज्य की सीमाओं से बाहर और वैश्विक बाजारों में अपनी फसल बेचने के लिए एक बड़े खरीदार की सख्त जरूरत है।

MAGA समर्थकों का तीखा विरोध क्यों?

इस बात को ऐसे समझिए कि एक तरफ मोंटाना के गवर्नर अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की उपज बेचने के लिए भारत आए हैं, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी ही पार्टी के MAGA कट्टरपंथी इस दौरे से आगबबूला हैं।

सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में गवर्नर के इस कदम की आलोचना हो रही है। आलोचकों का तर्क है कि जब एक तरफ MAGA समर्थक यह मांग करते हैं कि अमेरिका केवल अमेरिकी सामान खरीदे, तो फिर उनके गवर्नर विदेश जाकर व्यापार क्यों कर रहे हैं?

भारतीय फैकल्टी पर साधा निशाना

गौर करने वाली बात यह है कि इस विरोध ने तब एक अजीबो-गरीब रूप ले लिया जब मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी के उन प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं को निशाना बनाया जाने लगा जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं।

उदाहरण के लिए, मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी में कृषि इंजीनियरिंग पढ़ाने वाली भारतीय मूल की आईआईटी बॉम्बे से पीएचडी शिवाली बनर्जी और यूनिवर्सिटी के कृषि व इंजीनियरिंग विभागों में शीर्ष पदों पर बैठे श्रीकला और दिलप्रीत बाजवा को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियां की गईं। कट्टरपंथियों ने गवर्नर को ताने देते हुए लिखा कि आपको अमेरिका में रहकर अमेरिकियों के लिए काम करना चाहिए, भारतीयों के लिए नहीं। आप अमेरिका के गद्दार हैं।

रिपब्लिकन गवर्नर्स का डबल संकट

अच्छा, गौर करने वाली बात यह है कि यह संकट सिर्फ मोंटाना के गवर्नर जियानफोर्ट तक सीमित नहीं है। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट को भी हाल के हफ्तों में ऐसे ही विरोध का सामना करना पड़ा है। इन गवर्नर्स की मुख्य जिम्मेदारी अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाना, विदेशी निवेश लाना, अंतरराष्ट्रीय छात्र और कुशल श्रमिक तैयार करना है ताकि राज्य में नौकरियां और टैक्स रेवेन्यू बढ़ सके।

लेकिन MAGA आंदोलन की राजनीतिक भाषा इस मॉडल पर लगातार सवाल उठाती है। एक तरफ गवर्नर एच-1बी वीजा और आव्रजन नीतियों पर कड़ा रुख अपनाते हैं, तो दूसरी तरफ भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं और कारोबारियों को लुभाने की कोशिश भी करते हैं। इसी दोहरे रवैये और राजनीतिक तनाव के कारण गवर्नर्स के लिए संतुलन बनाना बेहद कठिन हो गया है।