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भारत ने उठाया सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा, रूबियो ने साध ली चुप्पी; 67 देशों की मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

Published: Sun, 19 Jul 2026 08:07 AM (IST)

अमेरिका ने वामपंथी उग्रवाद और राजनीतिक आतंकवाद पर 67 देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें भारत ने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया।

अमेरिका में वामपंथी आतंक पर 67 देशों की बैठक (फोटो-रॉयटर्स)

अमेरिका में वामपंथी आतंक पर 67 देशों की बैठक (फोटो-रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका ने वामपंथी उग्रवाद और राजनीतिक आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी मंत्रिस्तरीय बैठक बुलाई। इस बैठक में भारत समेत 67 देशों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा बैठक में मौजूद थे।

विदेश मंत्री एस जयशंकर के यात्रा पर होने के कारण वो इसमें शामिल नहीं हो सके।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक में सभी देशों में वामपंथी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि आज के वामपंथी आतंकवादी अलग-अलग देशों में काम करते हैं। एक देश में पैसा जुटाते हैं, दूसरे में संचार चलाते हैं, तीसरे में ट्रेनिंग लेते हैं, चौथे देश में आतंकवादियों की भर्ती करते हैं और फिर एकसाथ पांचवें देश में हमला करते हैं। इसलिए हमें मिलकर इस खतरे से लड़ना होगा।

meeting on terrorism

रुबियो ने दावा किया कि अमेरिका और यूरोप की आतंकवाद-विरोधी नीतियों की वजह से जिहादी आतंकवाद का खतरा काफी कम हो गया है। उन्होंने कहा कि जिहादी खतरा खत्म नहीं हुआ है, लेकिन पहले के मुकाबले कम है।

meeting on america

भारत की ओर से राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत वामपंथी उग्रवाद से लंबे समय से जूझ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। इसमें सीमा पार आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले समूह भी शामिल हैं।

इस बैठक में 67 देश शामिल हुए, लेकिन कई देशों ने सिर्फ जूनियर राजनयिक को भेजा। इसकी वजह इस्लामी कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी आतंकवाद की तुलना में वामपंथी खतरे को ज्यादा बढ़ाकर पेश करना बताया जा रहा है।

america on terrorism

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि रुबियो ने जिहादी आतंकवाद के खतरे को कम बताया। जबकि भारत के लिए यह खतरा आज भी उतना ही बड़ा है, जितना पहले हुआ करता था। 2025 में हुआ पहलगाम आतंकी हमला इसका बड़ा उदाहरण है।

रुबियो ने कहा कि जब तक आप्रवासन प्रणाली में खामियां रहेंगी, तब तक जिहादी खतरा बना रहेगा।

बैठक में अमेरिका ने साफ किया कि अब दुनिया को वामपंथी हिंसा के खिलाफ एक साथ आना होगा, चाहे व्यापार या आव्रजन जैसे मुद्दों पर मतभेद ही क्यों न हों।