हृयूस्‍टन, पीटीआइ। कभी ऐसा वक्‍त था जब मंगल ग्रह पर नमक की झीलें मौजूद थीं। यही नहीं ये धरती पर मौजूद झीलों की तरह ही बारिश और सूखे के दौर से भी गुजरी थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि मंगल ग्रह पर जलवायु को शुष्‍क हुए लंबा अरसा हो चुका है। जर्नल नेचर जियोसाइंस (journal Nature Geoscience) में प्रकाशित अध्‍ययन में यह दावा किया गया है कि तीन अरब साल पहले मंगल के गेल क्रेटर में यह झील मौजूद थी। 95 मील के क्षेत्र में फैले इस क्रेटर को नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने साल 2012 में खोजा था।

अध्ययन में कहा गया है कि मंगल ग्रह पर गेल क्रेटर का निर्माण लगभग 3.6 अरब साल पहले एक उल्का के गिरने से हुआ था। अध्‍ययन के सह लेखक मैरियन नाचोन के मुताबिक, गेल क्रेटर की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि मंगल पर तरल पानी मौजूद था जिसे माइक्रोबियल जीवन के अहम घटक के रूप में माना जाता है। टेक्‍सास की 'ए एंड एम यूनिवर्सिटी' के नाचोन के मुताबिक, नमक तालाबों का निर्माण शुष्क काल के दौरान ही हुआ होगा। लेकिन इस बारे में बिल्‍कुल सटीक यह नहीं कहा जा सकता है कि नमक के ये तालाब कितने बड़े थे।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, मंगल ग्रह पर नमक की ये झीलें धरती पर बोलीविया-पेरू सीमा के पास अल्टिप्लानो नामक क्षेत्र में मौजूद तालाबों के जैसी ही हैं। नाचोन ने कहा कि अल्टिप्लानो एक ऊंचा पठार है जहां पर्वत श्रृंखलाओं से निकलने वाली नदियां और धाराएं समुद्र में नहीं मिलती हैं बल्कि बंद घाटियों की ओर ले जाती हैं। यह भौगोलिक परिदृय ठीक वैसा ही है जो मंगल पर गेल क्रेटर में कभी हुआ करता था। वैज्ञानिकों की मानें तो मंगल पर जलवायु गीली और सूखे अवधि के बीच उतार-चढ़ाव वाली हो सकती हैं। 

अभी दो दिन पहले ही एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल और चंद्रमा ग्रह की कृत्रिम मिट्टी और वातावरण में फसलें उगाई हैं। रिपोर्ट से इसकी संभावना जगी है कि मंगल और चंद्रमा ग्रह पर भी फसलें उगाई जा सकती हैं। नीदरलैंड की वगेनिंगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने फसलें उगाने के काम को अंजाम दिया है। यही नहीं दावा यह भी किया गया है कि मंगल और चंद्रमा की मिट्टी पर उगाई गई फसलों से बीज भी प्राप्त कर लिए गए हैं ताकि फिर से नई फसल तैयार की जा सके।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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