मार्को रूबियो ने भारत को बताया अहम सहयोगी, बोले- ट्रंप टैरिफ के असर पर कर रहे विचार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि ट्रंप प्रशासन रूसी तेल आयात ...और पढ़ें
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो(फाइल फोटो)

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार और रणनीतिक सहयोगी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत जैसे मित्र देशों पर कोई भी टैरिफ या कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से पहले उनकी ऊर्जा जरूरतों और प्राथमिकताओं को समझना जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूसी ईंधन की बिक्री पर लगने वाले कई प्रतिबंधों को फिलहाल टालने का निर्णय लिया है। यह कदम लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम के तहत उठाया गया है।
टैरिफ पर 60 दिनों की रोक
संभावित नियमों के तहत, रूस से कच्चा तेल अथवा प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के शीर्ष पांच आयातक देशों से अमेरिका आने वाले सामानों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगाया जा सकता था, जिनमें भारत और चीन प्रमुख हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस फैसले पर 60 दिनों की अस्थायी रोक लगा दी है।
मार्को रुबियो ने बताया कि इस समय-सीमा का इस्तेमाल यह समझने के लिए किया जाएगा कि इन प्रतिबंधों और शुल्कों का असर वैश्विक व्यापार तथा खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर किस हद तक पड़ सकता है।
जामनगर के विशाल तेल रिफाइनरी का करेंगे दौरा
मार्को रूबियो 18 से 22 अक्टूबर तक भारत दौरे पर रहने वाले हैं, जहां वह जामनगर स्थित विशाल तेल रिफाइनरी का भी दौरा करेंगे। भारत के रुख का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के लिए सक्रिय प्रयास किए हैं।
इसके बावजूद, देश की विशाल आबादी और औद्योगिक जरूरतों के कारण रूस से भारी मात्रा में तेल आयात करना उसकी मजबूरी है, क्योंकि इस तरह की बड़ी निर्भरता को रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता।
उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका को एक ऐसा संतुलन तलाशना होगा जिससे भारत जैसे सहयोगी देश के हितों को नुकसान न पहुंचे।
बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य
अमेरिकी विदेश मंत्री ने बताया किया कि जब यह प्रतिबंध कानून तैयार किया गया था, तब से अब तक अंतरराष्ट्रीय हालात काफी बदल चुके हैं। दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति कई गंभीर संकटों से जूझ रही है।
लाल सागर और मध्य पूर्व में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे हमले, होर्मुज में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा ढांचे पर हो रहे प्रहारों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और कीमतों में उछाल ला दिया है। इन्हीं वैश्विक जोखिमों को देखते हुए अमेरिका को अपनी नीतियों में लचीलापन दिखाना पड़ा है।
भारत पर अभी नहीं लगेगा टैरिफ
राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्राहम अधिनियम की धारा 115 के तहत मिले विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए इन दंडात्मक शुल्कों को टालने की घोषणा की है। उन्होंने अमेरिकी संसद को भेजे आधिकारिक संदेश में कहा कि इस तरह की छूट देना वर्तमान में अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।
इस आदेश के माध्यम से रूसी सामानों पर लगने वाले 500 प्रतिशत तक के संभावित टैरिफ और प्रमुख आयातक देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क को रोक दिया गया है।
यह कदम रूस के साथ हुए उस हालिया समझौते के तुरंत बाद उठाया गया है, जिसके अंतर्गत रूस द्वारा अमेरिका को लाखों टन डीजल ईंधन की आपूर्ति की जानी है।
