नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। हमारे सौरमंडल में हजारों Asteroid (क्षुद्रग्रह) घूमते रहते हैं। इनमें से यदि कोई अचानक धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर जाता है और धरती से टकराता है तो बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। इस वजह से दुनिया की कुछ खास एजेंसियां इन पर भी नजर रखे रहती हैं जिससे इन एस्ट्रेरॉयड के बारे में पहले पता चल जाए। साथ ही ये जानकारी भी मिल जाए कि ये पृथ्वी के कितने पास से होकर गुजरेंगी या पृथ्वी की सतह से टकराएंगी। इस तरह की चीजों का पता चल जाने के बाद वैज्ञानिक उसी हिसाब से एहतियात बरतने की भी सलाह देते हैं। 

साल 2013 में गिरे उल्कापिंड ने मचाई थी तबाही

साल 2013 में एक उल्कापिंड धरती से टकराया था, उसने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। हालांकि कभी-कभी इन Asteroid को देखने से हमें खतरे का पता पहले चल जाता है जिससे बचने के लिए हम तैयार हो जाते हैं। साल 2013 में इस तरह की मानीटरिंग होने से चेल्याबिंस्क नामक उल्कापिंड का पता चल गया था। इस उल्कापिंड ने 7 हजार से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचाया था और लगभग 1500 लोगों को चोटें आईं थी। 

पृथ्वी के करीब से गुजर गया 2019 TA7 

नाटो के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज (CNEOS) के डेटा से पता चलता है कि "2019 TA7" नामक एक Asteroid (क्षुद्रग्रह) 14 अक्टूबर की रात को पृथ्वी के करीब से गुजर चुका है। इस asteroid का व्यास 15 से 34 मीटर के बीच था। इसके हमारे ग्रह के वायुमंडल में प्रवेश करने की उम्मीद नहीं थी, ऐसा ही हुआ। ये पृथ्वी के लगभग 1,485,000 किलोमीटर दूर से गुजर गया। लेकिन यदि ये हमारे वायुमंडल में प्रवेश कर जाता तो ये इसके पृथ्वी की सतह पर बरकरार रहने की ही संभावना नहीं थी क्योंकि इसका आकार बहुत छोटा था। 

छोटा होने के बावजूद मचाते हैं तबाही 

छोटा होने के बावजूद ये उल्कापिंड तबाही का कारण बनने में अधिक सक्षम होते हैं। क्योंकि ये काफी ऊंचाई से और तेज गति से गिर रहे होते हैं। गिरने के दौरान ये बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसा ही 13 फरवरी 2013 को चेल्याबिंस्क उल्कापिंड (Chelyabinsk Meteor) के गिरने पर हुआ था। ये लगभग 20 मीटर का उल्कापिंड था जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय तक टूटा नहीं था। एक तरह से देखा जाए तो ये कुछ परमाणु बमों की शक्ति वाला था। पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करने के बाद ये रूसी शहर में गिरा और वहां 7000 से अधिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही साथ 1500 लोगों को भी चोट पहुंचाई। 

पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते रहते हैं उल्कापिंड 

यह न तो पहली बार था ना ही आखिरी बार जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी की ओर आता हुआ दिखाई दिया है। कई बार ये पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचने से पहले ही खत्म हो जाते हैं तो कई बार धरती से टकराने के बाद खत्म होते है। TA7 2019 सूर्य की परिक्रमा कर रहा है। इसके अक्टूबर 2021 तक पृथ्वी के पास से गुजरने की उम्मीद है। 

19 अक्टूबर को पृथ्वी के करीब पहुंचेगा 

इस माह पृथ्वी के पास से एक अन्य asteroid के संपर्क करने की संभावना है। इस asteroid का नाम 2019 TK5 दिया गया है। 9 से 19 मीटर के व्यास वाला खगोलीय पिंड 2019 TA7 के करीब आएगा। यह पृथ्वी से लगभग 955,000 किलोमीटर दूरी पर है। नासा की ओर से 19 अक्टूबर को लगभग 7:33 बजे पृथ्वी के सबसे करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है। जैसे-जैसे ये पृथ्वी के पास आता जाएगा, इसके बारे में और भी डिटेल पता चलती जाएगी। 

Posted By: Vinay Tiwari

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