भारतीय अमेरिकी विरासत माह घोषित हो सकता है जुलाई, प्रस्ताव को 256 सांसदों का मिला समर्थन
अमेरिका में जुलाई को 'भारतीय अमेरिकी विरासत माह' घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसे प्रतिनिधि सभा के 256 सांसदों का समर्थन मिला है।

डेमोक्रेटिक सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने प्रस्ताव किया पेश। (फाइल फोटो।)
HighLights
जुलाई को 'भारतीय अमेरिकी विरासत माह' घोषित करने का प्रस्ताव।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के 256 सांसदों ने किया समर्थन।
भारतीय-अमेरिकियों के योगदान को सम्मानित करने का उद्देश्य।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका में जुलाई को ‘भारतीय अमेरिकी विरासत माह’ घोषित किया जा सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के आधे से अधिक सदस्यों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। डेमोक्रेटिक सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने सोमवार को यह प्रस्ताव पेश किया। इसका उद्देश्य अमेरिका में भारतवंशियों के योगदान को सम्मानित करना है।
435 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में इस प्रस्ताव को 256 सांसदों का समर्थन मिला है, हालांकि अभी इसे मंजूरी नहीं मिली है। यह जानकारी नहीं मिल सकी है कि इस प्रस्ताव को किस समिति के पास भेजा जाएगा। इस प्रस्ताव के लागू होने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रस्ताव में कहा गया है, भारतीय अमेरिकियों ने व्यापार, उद्यमिता, उच्च शिक्षा, आर्थिक अध्ययन, पत्रकारिता, साहित्य और परोपकार के क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अमेरिका की आर्थिक मजबूती और वैश्विक नेतृत्व में योगदान दिया है। प्रस्ताव में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का भी उल्लेख किया गया है।
कृष्णमूर्ति ने कहा, मुझे अपने 256 सहयोगियों के साथ मिलकर जुलाई को 'इंडियन अमेरिकन हेरिटेज मंथ' (भारतीय-अमेरिकी विरासत माह) के रूप में घोषित करने के प्रस्ताव का नेतृत्व करने पर गर्व है।
कृष्णमूर्ति ने कहा, भारतीय अमेरिकी समुदाय ने अमेरिका की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कृष्णमूर्ति ने इस पहल को अमेरिकी भारतीय समुदाय की उपलब्धियों और विरासत का सम्मान करने का प्रयास बताया।
जुलाई को भारतीय अमेरिकी विरासत माह चुनने के पीछे ऐतिहासिक कारण है। दो जुलाई, 1946 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन ने लूस-सेलर अधिनियम पर हस्ताक्षर किए थे।
इस कानून ने भारतवंशियों के लिए अमेरिकी नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया था। अमेरिका में 52 लाख से ज़्यादा भारतीय-अमेरिकी रहते हैं, जो सबसे अधिक धार्मिक विविधता वाले समुदायों में से एक हैं।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में भारत-विरोधी बयानबाजी बढ़ रही है, जिसकी झलक टेक्सास जैसे राज्यों में मध्यावधि चुनावों के प्रचार अभियान में भी देखने को मिलती है।
