'मुझे अपने भारतीय ससुराल वाले पसंद हैं, लेकिन...', बंधुआ मजदूरों वाली टिप्पणी पर बोले जेडी वेंस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा धारकों को बंधुआ मजदूर कहने वाली अपनी टिप्पणी पर सफाई दी है। उन्होंने ...और पढ़ें
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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा धारकों को बंधुआ मजदूर कहे जाने पर मचे विवाद के बीच अपनी सफाई दी है। वेंस ने कहा कि उनकी टिप्पणी विदेशी कर्मचारियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उनका शोषण करने वाली अमेरिकी कंपनियों के रवैये को लेकर थी।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी पत्नी उषा वेंस की भारतीय पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियों का बचाव भी किया।
टाउन हॉल में भारतीय मूल के नागरिक से बातचीत
मिशिगन के फ्लैट रॉक में आयोजित सीबीएस न्यूज के एक टाउन हॉल कार्यक्रम के दौरान वेंस ने यह बातें कहीं। इससे कुछ ही दिन पहले भारत ने उनकी पुरानी टिप्पणी को अनुचित और बेहद आक्रामक करार दिया था।
कार्यक्रम में करीब 20 साल पहले अमेरिका आकर बसे भारतीय मूल के नागरिक निव अगारम ने वेंस पर प्रवासियों को बलि का बकरा बनाने का आरोप लगाया।
इस पर वेंस ने स्वीकार किया कि इस विषय पर उनके शब्द पूरी तरह सही नहीं रहे होंगे, लेकिन उनका मकसद लोगों को नहीं, बल्कि व्यवस्था और कंपनियों की गलत नीतियों को निशाना बनाना था।
पत्नी उषा के भारतीय मूल का जिक्र कर दी सफाई
वेंस ने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब वे बंधुआ मजदूर शब्द का इस्तेमाल करते हैं, तो वह कर्मचारियों की आलोचना नहीं होती, बल्कि उन कंपनियों की आलोचना होती है जो इस व्यवस्था का दुरुपयोग करती हैं।
उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सास और ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आए थे। उनकी बेटी, जो अमेरिका में ही जन्मीं और पली-बढ़ीं, आज अमेरिका की सेकंड लेडी हैं और उन्हें अपनी पत्नी उषा पर बहुत गर्व है।
वेंस ने जोर देकर कहा कि वे एक ऐसा आव्रजन ढांचा चाहते हैं जो मूल्य जोड़ने वाले हुनरमंद लोगों का स्वागत करे, लेकिन साथ ही अमेरिकी कामगारों के हितों की भी रक्षा करे।
कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के शोषण पर उठाए सवाल
उपराष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि कई अमेरिकी कंपनियां पहले स्थानीय कामगारों को निकालती हैं और फिर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को कम शर्तों पर लाती हैं। उन्होंने कहा कि एच-1बी वीजा धारक अमेरिका में रहने के लिए पूरी तरह अपनी कंपनी पर निर्भर हो जाते हैं।
अगर वे कंपनी के अनुचित फैसलों का विरोध करते हैं, तो उनके सामने सिर्फ नौकरी गंवाने का नहीं, बल्कि देश छोड़ने का भी खतरा पैदा हो जाता है।
वेंस के अनुसार, मौजूदा वीजा नियम कंपनियों को जरूरत से ज्यादा ताकत दे देते हैं, जिससे विदेशी कर्मचारियों का शोषण आसान हो जाता है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जोड़ा कि बहुत तेज आव्रजन से स्थानीय सामाजिक ताने-बाने पर भी असर पड़ता है।
क्या है एच-1बी वीजा का पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड दिलाने वाले एक कार्यक्रम से कई कंपनियों को निलंबित कर दिया, जिनमें प्रमुख भारतीय आईटी फर्में भी शामिल थीं।
प्रशासन का तर्क था कि इससे स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के लिए नौकरियों के मौके बंद हो रहे हैं। इसी फैसले के समय जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा धारकों को बंधुआ मजदूर और संबंधित कंपनियों को वीजा मिल कहा था।
एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों को तकनीकी और विशेष क्षेत्रों में विदेशी प्रतिभाओं को नौकरी पर रखने की सुविधा देता है। इस वीजा का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों को मिलता रहा है, जिनकी हर साल मंजूर होने वाले कुल एच-1बी आवेदनों में 70 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रहती है।
