न्‍यूयॉर्क (यूएन)। बेहतर जिंदगी की तलाश में एक बार फिर से 40 लोगों की जान भूमध्‍य सागर ने लील ली। इस वर्ष की ये पहली ऐसी घटना है जिसमें दूसरे देश में शरण लेने के मकसद से निकले लोगों का जहाज समुद्र में हादसे का शिकार होकर डूब गया। ये घटना उस वक्‍त हुई जब लीबियाई शहर से एक जहाज मंगलवार को सुबह कुछ लोगों को लेकर निकला था। लेकिन कुछ ही देर बाद बीच रास्‍ते में पहले इस जहाज के इंजन में खराबी आई और फिर ये टूट कर समुद्र की गहराई में समा गया। बचाव दल इसमें सवार केवल दस लोगों को ही बचा सके। संयुक्‍त राष्‍ट्र की खबर के मुताबिक जिन्‍हें बचाया गया है उनका संबंध घाना, जांबिया और आइवरी कोस्‍ट से है। खबर के मुताकबक इस हादसे में मारे गए सभी लोग पश्चिमी अफ्रीका से संबंध रखते थे।

शरणार्थियों पर नजर रखने वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र की संस्‍था आईओएम की मार्च 2020 में आई एक रिपोर्ट बताती है कि 2019-2020 में करीब 110669 शरणार्थियों ने यूरोप की राह पकड़ी थी, जिसमें से एक लाख लोगों ने इसके लिए भूमध्‍य सागर से होकर जाने वाला रास्‍ता अपनाया था। वहीं वर्ष 2018 में इस रास्‍ते से यूरोप समेत अन्‍य देशों में जाने वाले शरणार्थियों की संख्‍या 116273 थी। इन शरणार्थियों में महिलाएं, बच्‍चे और पुरुष शामिल थे। वही इस रास्‍ते पर हुई मौतों की बात करें तो इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019 में अलग-अलग वजहों से हुए हादसों के चलते 1283 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। वहीं 2018 में इससे कहीं अधिक मौत इस रास्‍ते पर हुई थीं। इस दौरान 2299 लोगों की मौत हुई थी। संयुक्‍त राष्‍ट्र की ये रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2014 से मार्च 2020 तक इस रास्‍ते पर 19164 लोगों की जान जा चुकी है।

वहीं पूरी दुनिया में वर्ष 2014 से अब तक 34532 लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी शरणार्थी के तौर पर दूसरे देशों में जा रहे थे। हालांकि संयुक्‍त राष्‍ट्र की तरफ से दिए गए बयान में ये भी कहा गया है कि बीते वर्ष जितनी संख्‍या बताई गई है मरने वालों की वास्‍तविक संख्‍या इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र की खबर के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में भूमध्‍य सागर में चलाए गए बचाव अभियान का दायरा कम हुआ है। यही वजह है कि यहां पर होने वाली मौतों का आंकड़ा भी पहले के मुताबिक ऊपर हुआ है। कई गैर सरकारी संगठनों ने इसके लिए यूरोपीय संघ और सदस्‍य देशों को जिम्‍मेदार ठहराया है। इन संगठनों का कहना है कि ये देश शरणार्थियों के लिए अपनी जिम्‍मेदारी से मुंह चुरा रहे हैं। इस घटना और इन गैर सरकारी संगठनों की आवाजों के मद्देनजर संयुक्‍त राष्‍ट्र की विभिन्‍न एजेंसियों ने अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय से इस और मदद के लिए आगे आने और भूमध्‍य सागर के लिए अपनाई जा रही रणनीति में तुरंत बदलाव की वकालत की है।

यूएन ने कहा है कि ऐसे बंदरगाह जो किसी भी तरह के यात्रियों के लिए खतरा हैं उन्‍हें बंद किया जाना चाहिए। इसके अलावा ऐसे देश जहां पर शरणार्थियों के पहुंचने की संख्‍या ज्‍यादा है वहां पर एक ऐसा ढांचा तैयार जिससे वे लोग अपनी एकजुटता को जाहिर कर सकें। यूएन की खबर की मानें तो लीबिया से बेहतर जिंदगी की उम्‍मीद में दूसरे देशों का रुख करने वालों को कई तरह से जोखिमों का सामना करना पड़ता है। इन्‍हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार करने और बेहद दयनीय परिस्थितियों में जेलों में रखने का भय हमेशा ही बना रहता है। इसके अलावा इन लोगों पर हमेशा ही मानव तस्‍करों की नजर बनी रहती है। यूएन की तरफ से कहा गया है कि इन लोगों के शोषण और मानवाधिकार हनन के लिए जो भी लोग जिम्‍मेदार हैं उनके खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसा न होने पर इन लोगों के लिए खतरा हमेशा ही बना रहेगा।

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