द न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन। डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन लेने के लिए बार-बार इंजेक्शन लेना पड़ता है। इसके अतिरिक्त कैंसर व अन्य घातक बीमारियों की दवा भी इंजेक्शन से ही लेनी पड़ती है। ये दवाइयां इतने बड़े अणुओं से बनी होती हैं कि मरीज की आंत इसे पचा नहीं पाती है। इसी के चलते लंबे समय से वैज्ञानिक ऐसा तरीका विकसित करने की कोशिश में थे जिसकी मदद से मरीजों को बिना इंजेक्शन के ही इंसुलिन जैसी दवाएं दी जा सकें। इस क्षेत्र में उन्हें बड़ी सफलता हाथ लगी है।

मैसेचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी व हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोटिक कैप्सूल तैयार किया है जिसकी मदद से मरीज के शरीर में इंसुलिन आसानी से पहुंच सकता है। इस कैप्सूल में कछुए के खोल के आकार की सोमा नामक सूक्ष्म डिवाइस रखी गई हैं जिसके अंदर इंसुलिन या अन्य दवाएं भरी जा सकती हैं। पेट में पहुंचने के बाद सोमा में मौजूद दवा शरीर में रिलीज हो जाएगी। इसके बाद यह सूक्ष्म डिवाइस मलाशय के रास्ते शरीर से बाहर आ जाएगी।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसे कछुए के खोल का आकार इसलिए दिया गया ताकि यह पेट में पहुंचने के बाद सही दिशा में मुड़े और दवा बिना किसी गड़बड़ी के रिलीज हो सके। फिलहाल इस उपकरण का प्रयोग सूअरों व चूहों पर किया जा रहा है। तीन सालों में मनुष्यों पर भी इसका चिकित्सकीय परीक्षण शुरू हो जाएगा। अन्य यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने भी इस डिवाइस को बड़ी सफलता माना है।

Posted By: Sanjay Pokhriyal