वाशिंगटन, प्रेट्र। अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले हजारों भारतीयों को तात्कालिक राहत मिली है। अमेरिका की अदालत ने ओबामा सरकार के उस नियम को रद करने से इन्कार कर दिया है, जिसके तहत एच-1बी वीजा धारक भारतीय पेशेवरों के पति या पत्नी को वहां काम करने की अनुमति मिली हुई है।

कोलंबिया सर्किट जिले की अपील अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को इस मामले को वापस निचली अदालत में भेज दिया और उससे पूरी तरह से सोच-विचार कर इस पर अंतिम फैसला लेने को कहा।

मिलता है विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने का अधिकार 

एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसाय के लिए विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने का अधिकार मिला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पूर्ववर्ती बराक ओबामा सरकार के दौरान 2015 में बने एक नियम के तहत कुछ खास श्रेणी के एच-4 वीजा धारकों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिली है, खासतौर पर एच-1बी वीजा धारकों के पति या पत्नी को जो जिन्हें अभी ग्रीन कार्ड नहीं मिला हो।

भारतीय महिलाओं को मिलता है लाभ 

इस नियम का सबसे ज्यादा लाभ खासकर भारतीय महिलाओं को मिलता है, जिनके पति एच-1बी वीजा पर अमेरिका में नौकरी करते हैं। अमेरिका के कर्मचारी इस नियम को खत्म करने की मांग कर रहे हैं और ट्रंप प्रशासन भी उनके साथ है। अगर यह नियम खत्म हो जाता है तो एच1बी वीजा पर अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीय की पत्नी या पति तब तक वहां नौकरी नहीं कर सकते हैं, जब तक उन्हें ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता।

अमेरिका ने H-1B वीजा का आवेदन शुल्क बढ़ाया  

अमेरिका ने पिछले दिनों संशोधित चयन प्रक्रिया के तहत कार्य वीजा  H-1B आवेदन शुल्क में 10 USD (यानी 712 रुपये) की वृद्धि की है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने गुरुवार को कहा कि यह गैर-वापसी योग्य शुल्क एच -1 बी कैप चयन प्रक्रिया को याचिकाकर्ताओं और संघीय एजेंसी दोनों के लिए अधिक कुशल बनाने के लिए नए इलेक्ट्रॉनिक पंजीकरण प्रणाली का समर्थन करेगा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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