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वाशिंगटन, पीटीआइ। अमेरिका में एक भारतीय डिजिटल कंपनी पर गैर-भारतीयों के साथ भेदभाव करने और दक्षिण एशिया के लोगों को भर्ती और नौकरियों में वरीयता देने को लेकर आरोप लगा है। अमेरिकी नागरिक टैमी सुलजबर्ग ने इसे लेकर मुकदमा दायर किया है। टैमी का आरोप है कि सैन जोस स्थित हैप्पीस्ट माइंड्स कंपनी में कम से कम 90 प्रतिशत लोग दक्षिण एशियाई मुख्य रूप से भारतीय हैं। हैप्पीस्ट माइंड्स कंपनी का मुख्यालय बैंगलोर में है।

इस मुकदमा में उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-दक्षिण एशियाई और गैर-भारतीय व्यक्तियों को अक्सर दक्षिण एशियाई और भारतीय व्यक्तियों के पक्ष में उनके वर्तमान पदों से हटा दिया जाता है। सुलजबर्ग ने कहा कि उन्हें डायरेक्टर ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट के पद से उन्हें हटाकर सेल्स के पद पर कर दिया गया। उनकी जगह चंदन दास जो भारत से अमेरिका आया था उसे रख लिया गया।  

दक्षिण एशियाई और भारतीय आवेदकों को अधिक वरीयता
मुकदमे के अनुसार, हैप्पीस्ट माइंड्स कंपनी दक्षिण एशियाई और भारतीय आवेदकों को अमेरिका में गैर-दक्षिण एशियाई और गैर-भारतीय आवेदकों से अधिक वरीयता देती है। जनवरी 2014 से अक्टूबर 2018 तक कंपनी ने अमेरिका में 52 लोगों को नौकरी पर रखा जिनमें से 29 लोग दक्षिण एशियाई हैं। इनमें से 26 लोग वीजा पर निर्भर हैं। मुकदमा में आरोप लगाया गया है कि हैप्पीस्ट माइंड्स दक्षिण एशियाई और भारतीयों को रखने के लिए गैर-दक्षिण एशियाई और गैर-भारतीयों को कंपनी से बाहर कर देता है।

कोर्ट से की गई ये मांग
कंपनी पर आरोप है कि गैर-दक्षिण एशियाई लोगों को सेल्स में रखा जाता है और उन्हें दक्षिण एशियाई और भारतीयों की तुलना में नौकरी से बाहर कर दिया जाता है। यह  मुकदमा, अदालत से एक आदेश चाहता है, जिसमें हैप्पीस्ट माइंड को काम पर रखने, में गैर-दक्षिण एशियाई लोगों से भेदभावपूर्ण न करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा आईटी कंपनी से  नुकसान की भरपाई की भी मांग की गई है।

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Posted By: Tanisk

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